Saturday, December 26, 2009

प्रदेश के नए इलाके भी अब नक्सलियों के चंगुल में


छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग और सरगुजा संभाग के बाद अब नए जिले भी नक्सलियों के चंगुल में आ चुके है। रायपुर जिले का गरियाबंद , मैनपुर और धमतरी जिले का नगरी सिहावा इलाका पहले से ही प्रभावित है। वहीं बिलासपुर,कोरबा,रायगढ़ जैसे शांत प्रदेश भी अब नक्सली गतिविधियों से परचित हो रहे है। हालांकि बिलासपुर,कोरबा,रायगढ़ में नक्सलियों ने अब तक कोई हिंसात्मक घटना को अंजाम नहीं दिया है। लेकिन उनकी घुसपैठ से पुलिस भी इंकार नहीं करती है। सूत्रों के मुताबिक कोरबा के खदान वाले क्षेत्रों में आठ महीना पहले ही नक्सली हलचल से वहां दहशत फैल गया था। तत्कालीन एसपी रतन लाल डांगी ने स्वीकारा था कि नक्सली हलचल इस क्षेत्र में शुरुआती दौर में है। दूसरी ओर डीजीपी विश्वरंजन का कहना है कि नक्सली बस्तर और सरगुजा में दबाव बढऩे पर नए जिले में घुसपैठ कर रहे है। इसके पीछे फोर्स का ध्यान भटकाना है। पुलिस और खुफिया तंत्र ऐसी गतिविधियों पर पूरी तरह नजर रख रकी है। गरियाबंद में फोर्स भेजा जा चुका है। नए क्षेत्रों में जरुरत पडऩे पर फोर्स भेजा जाएगा। रायगढ़ जिले के कोपा में पकड़े गए नक्सली नेता संजय चक्रधारी से पूछताछ चल रही है। उसके निशानदेही पर टिफिन बम खोज निकला गया है। जिसे उसने पहाड़ में गढ्ढ़्ा खोदकर दबा रखा था। इससे स्पष्ट है कि वह किसी बड़े नक्सली वारदात के चक्कर में था। छत्तीसगढ़ का कश्मीर खतरे में छत्तीसगढ़ का कश्मीर कहे जाने वाले मैनपाट (ठंडा इलाका)की पहाड़ी अब नक्सली घुसपैठ से जूझ रहा है। नेपाली दस्ता से अलग हुए नक्सली कमांडर संजय चक्रधारी से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस यहां भी छानबीन कर रही है।

Friday, December 18, 2009

विशेष जन सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तारियों की तैयारी


केन्द्रीय गृह विभाग द्वारा चलाए जाने वाले एंटी नक्सल आपरेशन में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकने के लिए नक्सली समर्थकों पर राज्य विशेष जनसुरक्षा कानून का सहारा लिया जा सकता है। प्रदेश में नक्सली समर्थकों का विरोध शुरू हो गया है, जिसे देखते हुए पुलिस बड़ी कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। बस्तर में नक्सलियों द्वारा जनप्रतिनिधियों को निशाने पर लेने के साथ ही नक्सली समर्थकों के खिलाफ भी बगावत शुरू हो गई थी। ग्रामीण इलाकों और शहरों में रह रहे नक्सली समर्थकों के खिलाफ वातावरण तैयार होने लगा है। लगातार एकतरफा रिपोर्ट से बस्तरवासियों में एनजीओ से जुड़े लोगों के खिलाफ जनाक्रोश फैल रहा है। इनके द्वारा सिर्फ सरकारी शोषण का ही विरोध की जा रही है। सोमवार को दूसरे राज्यों से नक्सल प्रभावित इलाके में सर्वे करने आए संगठनों के खिलाफ राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक डा.सलीम राज और होटल कर्मचारी संघ के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए विरोध किया था। वहीं वनवासी चेतना आश्रम द्वारा निकाली जा रही पदयात्रा का स्थानीय आदिवासियों ने जमकर विरोध किया है। नक्सली समर्थकों के खिलाफ खड़े हो रहे लोगों के आक्रोश से मामला बिगड़ता देख पुलिस मुख्यालय में डीजीपी विश्वरंजन और संयुक्त नक्सल आपरेशन के एडीजी रामनिवास ने अफसरों की बैठक ली है। इसमें राजधानी सहित बस्तर, सरगुजा, राजनांदगांव, धमतरी में समर्थकों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इनके खिलाफ बहुत लंंबे समय से आईबी और राज्य खुफिया विभाग के पास महत्वपूर्ण जानकारियां हैं, लेकिन पुलिस उचित मौके का इंतजार कर रही थी। राज्य विशेष जनसुरक्षा कानून के तहत 2007 और 2008 में हुई गिरफ्तारियों के बाद इस कानून को लेकर हुए विरोध के कारण पुलिस जिन नक्सली समर्थकों को घेरने में असफल रही थी, उनकी दोबारा फाइल खोली जा रही है। डीजीपी को ज्ञापन सौंपा मां दंतेश्वरी आदिवासी स्वाभिमान मंच दंतेवाड़ा के पदाधिकारियों ने सुखदेव तांती ,छविंद्र कर्मा के नेतृत्व में मंगलवार की शाम डीजीपी विश्वरंजन से मुलाकात कर नक्सली समर्थकों के खिलाफ जनाक्रोश से अवगत कराते हुए नक्सली समर्थकों को जल्दी गिरफ्तार करने की मांग की है।

Thursday, December 17, 2009

सलवा जूड़ूम के बाद नक्सली हिंसमें बढ़ोत्तरी हुई


वनवासी चेतना आश्रम के संस्थापक ने अपने ऊपर नक्सली समर्थक होने के लग रहे आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वे बस्तर में शांति चाहते है, लेकिन पुलिस बल ,सलवा जुड़ूम,और नक्सली वहां हिंसा चाहते है। इसलिए शांतिवार्ता के लिए चलाए जा रहे पदयात्रा का विरोध किया जा रहा है।
वनवासी चेतना आश्रम के हिमांशु कुमार, पीयूसीएल के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सायल ,जनआंदोलन के राष्ट्रीय समंव्यक डॉ संदीप पांडे ने एक संयुक्त पत्रकारवार्ता में कहा कि बस्तर में जब से सलवा जूड़ूम आंदोलन शुरु हुआ है नक्सली हिंसा में तेजी आई है। जिसमें आम नागरिक ,पुलिस और नक्सली हजारों की संख्या में मारे गए है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आदिवासियों को जंगल से खदेड़ने और माइनिंग उद्योगों को वहां स्थापित करने के लिए सरकार वहां फोर्स तैनात कर रही है। इससे औद्योगिक घरानों और राज्य के कुछ खास लोगों को जरुर लाभ होगा, लेकिन आदिवासी को इससे कोई लाभ नहीं होगा। हम सभी प्रकार की हिंसा के खिलाफ है। हिमांशु कुमार ने कहा कि उनके खिलाफ अगर कोई अपराधिक मामले हैं तो उन्हें पुलिस गिरफ्तार क्यों नहीं करती है। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सलवा जूड़ूम कैंप में रह रहे ग्रामीणों को पुर्नावास करवाना चाहते है। कैंप की जिंदगी से तंग आ चुके ग्रामीण अपने गांव जाना चाहते है। राज्य के गृह सचिव ने बस्तर के सभी जिलाधीश और एसपी को आदेश दिया है कि वह ग्रामीणों को गांव में बसाए। हम इस आदेश का पालन करवाना चाहते है। इस कारण पदयात्रा निकाली जा रही थी। लेकिन इसमें शामिल होने वाले लोगों को पुलिस द्वारा रोका गया। यह संवैधनिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

Tuesday, December 15, 2009

नौ साल में एक हजार सिर कलम




रायपुर। राज्य निर्माण के बाद से अब तक नक्सलियों और पुलिस के बीच चल रहे संघर्ष में नक्सलियों ने एक हजार ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया है। इनमें अधिकांश का सिर कलम कर दिया गया। इन पर नक्सलियों ने पुलिस के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाया था। दूसरी ओर पुलिस ने नक्सलियों द्वारा मारे गए ग्रामीणों को अपना मुखबीर मानने से हर बार इंकार किया है। राज्य निर्माण के बाद से अब तक नक्सली एक हजार एक सौ बत्तीस ग्रामीणों को कूरतापूर्वक गला रेतकर मौत के घाट उतार चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि नक्सली बात नहीं मानने पर मारपीट करते हैं। पुलिस की मुखबीरी करने और किसी भी नक्सली घटना में पुलिस द्वारा गवाह बनाए जाने पर भी वे ग्रामीणों की भीड़ एकत्र कर खुलेआम अमानवीय सजा देते हैं। बस्तर संभाग सहित राजनांदगांव में भी ऐसी अमानवीय मुहिम जारी है। यही कारण है कि अब नक्सलियों के खिलाफ ग्रामीणों में दहशत व नफरत बढ़ती जा रही है, लेकिन जहां नक्सली उनके साथ अमानवीय सलूक करते हैं, वहीं सरकार और पुलिस का रवैया भी किसी तरह कम नहीं आंका जा सकता। लगातार संख्या बढ़ी राज्य बनने के बाद नक्सली हिंसा में मरने वाले ग्रामीणों की संख्या लगातार बढ़ती रही। राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज होने पर मौत के आंकड़े भी बढ़े। इसी तरह नौ साल में मारे गए नक्सलियों की संख्या की पुलिस ने 405 दर्ज की है। इस मामले में पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ में नक्सली इससे ज्यादा मारे गए हैं। लेकिन पुलिस ने नक्सलियों के शव बरामदगी के आधार चार सौ पांच की संख्या दर्ज की है। वहीं इस दौरान पुलिस और केन्द्रीय अर्धसैनिक बल के 461 जवान मारे गए हैं।

मृतकों को शहीद का दर्जा मिले
नक्सलविरोधी आंदोलन चलाने वाले छत्तीसगढ़ लोकतांत्रिक एक्शन कमेटी के प्रभारी डॉ.उदयभान सिंह चौहान ने कहा कि बस्तर में युद्ध की स्थिति है। पुलिस और नक्सलियों के संघर्ष में मारे जाने वाले ग्रामीणों को सरकार शहीद घोषित करते हुए उनके परिवार को राहत राशि देने के साथ ही एक सदस्य को पुलिस में नौकरी दे। लंबे समय से पुलिस अपने लिए काम करने वाले ग्रामीणों को मौत के घाट उतारे जाने पर पल्ला झाड़ लेती है। कानून का साथ देने वाले साहसी लोगों का सम्मान करने से सरकार को भी बचना नहीं चाहिए।

ग्रामीणों की मौत के आंकड़े
वर्ष मृत ग्रामीण
2000 --- 20
2001 --- 23
2002----- 29
2003 ---- 36
2004 ----61
2005 ----126
2006 ---306
2007---166
2008---- 143
2009 --- 102(30 नवंबर तक)
नक्सली अपनी बात नहीं मानने वाले ग्रामीणों को अमानवीय तरीके से मौत के घाट उतारते हैं। गांवों में अपना दहशत कायम करने के साथ मृतक पर भी दोष गढ़ने की नीयत से उसे पुलिस का मुखबीर घोषित करते हैं। यह बात अब बस्तर के ग्रामीण अच्छी तरह समझने लगे हैं। नक्सलियों का दबाव रहता है कि ग्रामीण उनके संघम सदस्य बनें और जनमिलिशिया जैसे दल में शामिल हो जाएं।
- विश्वरंजन
डीजीपी

Thursday, September 24, 2009

chidambaram naksali samsya par lege baitak

होम मिनिस्टर पी चिदम्बरम २५ सितम्बर को छत्तीसगढ़ प्रवास पर है,सुबह ८ बजे राज्यपाल से मुलाकात के बाद वह ११ बजे मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिह , ग्रह मंत्री ननकी राम कवर ,ग्रह सचिव एन के आसवाल ,डीजीपी विश्वरंजन ,एडीजी (नक्सल आपरेशन ) रामनिवास , एडीजी (एस आई बी ) गिरधारी नायक ,डीआई जी पवन देव ,सहित नक्सल आपरेशन से जुड़े अफसर शामिल होगे ,,दिसम्बर से नक्सलियों के खिलाफ पॉँच राज्यों में एक साथ आभियान चलाया जाएगा ,इस बैठक के बाद दोपहर 200बजे श्री चिदंबरम रांची झारखण्ड , के लिए विशेष विमान से रवाना हो जायेगे ,

Saturday, September 19, 2009

३० नक्सली मारे जाने की संभावना

दंतेवाडा के किस्ताराम थाना इलाके में कोबरा कमांडो ने सयुक्त आपरेशन में नक्सलियों का हथियार बनाने के फैक्टरी में छापा मारकर कब्जा कर लिया है ,इस हमले में २०० नक्सली भागने में सफल होगये ,इनमे ३० के मरे जाने की संभावना है,७ नक्सलियों का शव पुलिस ने बरामद कर लिया है,नक्सल ओपरेशन के विशेष महानिदेशक विजय रमन और सयुक्त ओपरेशन के अतरिक्त महानिदेशक रामनिवास शनिवार को दंतेवाडा पहुचे ,यहाँ आफ्सरो की बैठक ली ,इसमे बस्तर आई जी टी जे लंगाकुमेर भी शामिल हुए थे,

Tuesday, September 15, 2009

नक्सल आपरेशन का प्रभार को एडीजी रामनिवास को

राज्य सरकार ने नक्सल आपरेशन का प्रभार अतरिक्त महानिदेशक रामनिवास को दिया गया , राजनादगांव की घटना के बाद रामनिवास को नक्सल आपरेशन का प्रभारी बनाया गया था ,उस समय उनके पास सी आई डी का प्रभार भी था,लेकिन अब उन्हें छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल का प्रभार दिया है,इससे वह एस टी ऍफ़ और नक्सल आपरेशन से जुड़े ओपरेशन का नेत्रत्व करेगे ,, इसके साथ ही आई जी राजेश मिश्रा को बनाया गया है,इससे पहले इस सेल में एसपी, ऐएसपी, डी एस पी , की नियुक्ति हुई हो चुकी है ,,

Thursday, September 10, 2009

टास्क फोर्स के कमांडर विजय रमन ने ली बैठक

पुलिस मुख्यालय में टास्क फोर्स के कमांडर विजय रमन ने बीएसऍफ़ और के aafsro की बैठक ली ,इस बैठक में ग्रह sachiv n k aasval , dgp visvranjan ,adg ramnivas , ig dm avasthi ,dig पवन dev shamil hue ,,

१४ को नक्सल समस्या पर दिल्ली में बैठक

नक्सल प्रभावित राज्यों की बैठक १४ सितबर को दिल्ली में केन्द्रीय ग्रह विभाग ने आयोजित की है ,,,इस बैठक में उरिसा ,महारास्ट्र,झारखण्ड ,छत्तीसगढ़ ,सहित आंध्रप्रदेश केडीजीपी शामिल होगे ।

Wednesday, September 9, 2009

टास्क फोर्स कमांडर विजय रमन का दौरा

नक्सल प्रभवित राज्यों के लिए टास्क फोर्स के कमांडरविजय रमन छत्तीसगढ़ आ रहे है

Tuesday, August 4, 2009

हीरा खदान से फोर्स हटा नक्सलियों की घुसपैठ हुई आसन

प्रदेश के बेशकीमती खनिज स्थल पायलीखंड हीरा खदान की सुरक्षा अब नक्सलियों के भरोसे है। यहां तैनात फोर्स को नक्सली हमले की आशंका में हटा दिया गया है। इंद्रावन नदी में उफान आने के कारण पायलीखंड इलाका पानी से चारों तरफ से घिर गया है, वहीं नक्सलियों ने किसी भी तरह से फोर्स को हटवाकर ग्रामीणों को कीमती खनिज के दोहन का भरपूर मौका दिया है। इससे ग्रामीणों के बीच नक्सलियों का जनाधार बढऩे के साथ ही कीमती खनिज पर अधिकार भी बढ़ गया है।उड़ीसा सीमा से लगे नक्सल प्रभावित गरियाबंद का पायलीखंड इलाका तेज बारिश और इंद्रावन नदी में आए उफान के कारण टापू के रूप में तब्दील हो चुका है। पिछले एक साल से आसपास के गांव में अपनी घुसपैठ बना चुके नक्सली बारिश का लाभ उठाकर यहां अपना कब्जा जमा सकते हैं। पायलीखंड के चारों तरफ पानी भर जाने पर यहां तैनात बीएसएफ के १८ जवानों ने मदद मांगी थी। पुलिस प्रशासन पानी से घिरे पायलीखंड में मदद करने की स्थिति में नहीं था। इस कारण पिछले सप्ताह उन्हें वहां से हट जाने का आदेश दिया गया था। गरियाबंद नक्सल आपरेशन एसपी सैय्यद आरिफ हुसैन ने स्वीकारा कि नक्सली हमले की आशंका में फोर्स को हटा लिया गया है, वहीं जवानों के हटते ही आसपास के गांव से ग्रामीण हजारों की संख्या में इन इलाकों में पानी में बहकर मिलने वाले कीमती खनिज (कच्चे हीरे) की तलाश में पहुंच चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक बारिश का महीना आते ही मुंबई, गुजरात व राजस्थान के हीरा तस्कर यहां सक्रिय हो जाते हैं। इस बार नक्सली दहशत में वे पायलीखंड से दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन गरियाबंद और उड़ीसा बार्डर में उनकी सक्रियता देखी गई है।बाक्सनक्सलियों का सपनाबस्तर के बाद नक्सली गरियाबंद इलाके के कीमती खनिज खदानों पर कब्जा करने का सपना देखते थे। पिछले एक दशक से प्रयासरत नक्सलियों ने २००७ में यहां अपनी मौजूदगी का अहसास करा दिया, जब पहली बार मैनपुर में नक्सली कमांडर गोपन्ना उर्फ गजाला उर्फ सत्यम रेड्डी ग्रामीणों की बैठक लेते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद पायलीखंड पर नक्सलियों की घुसपैठ को देखते हुए तत्कालीन जिलाधीश सोनमणि बोरा ने यहां सुरक्षा कड़ी करते हुए बीएसएफ के जवानों को तैनात करवाया था। २००८ में पूर्व सरपंच की हत्या कर नक्सलियों ने उसे पुलिस का मुखबिर घोषित किया था। इस घटना के बाद २००९ में धमतरी के नगरी सिहावा में विस्फोट के बाद सौ से ज्यादा नक्सलियों को इस इलाके में घूमते देखा गया था।वर्सनपायलीखंड के आसपास इंद्रावन नदी का पानी भर गया था। इस कारण वहां तैनात जवानों को बाहर से मदद नहीं भेजी जा सकती थी। इससे नक्सली हमले की संभावना बढ़ गई थी। पानी उतरते ही पायलीखंड में अतिरिक्त फोर्स भेजकर जवानों को तैनात किया जाएगा। हीरे की तस्करी रोकने के लिए पुलिस ने गरियाबंद से बाहर निकलने वाली सीमा में जांच पड़ताल शुरू कर दी है।-एनके असवाल, प्रमुख सचिव गृह

Friday, July 31, 2009

मुख्यमंत्री ने ली पुलिसअफसरों की क्लास


मुख्यमंत्री डा।रमन सिंह व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में अफसरों की मैराथन बैठक ली। हाल के दिनों में नक्सल वारदातों में बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने नाराजगी फटकार लगाई, वहीं अफसरों में व्याप्त गुटबाजी पर जमकर भड़के। मुख्यमंत्री डा.रमन ने दो टूक शब्दों में अफसरों को नक्सल आपरेशन के पुख्ता एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डा.रमन ने मुख्यालय में फेरबदल का भी इशारा किया है।विधानसभा के मानसून सत्र से फुरसत पाने के बाद आज सुबह करीब ११ बजे मुख्यमंत्री व गृहमंत्री छापामार अंदाज में पुलिस मुख्यालय पहुंचे। उनके अचानक पहुंचने पर मुख्यालय में हड़कंप मच गया। जब श्री सिंह वहां पहुंचे तब कुछ गिने-चुने अधिकारी ही वहां मौजूद थे। उनके आगमन की खबर पाते ही अफसरों ने बेल्ट कसी और वे पुलिस मुख्यालय की तरफ दौड़े। कुछ ही देर में ही पीएचक्यू का कांफ्रेंस हाल पुलिस अफसरों से पट गया। मुख्यमंत्री ने पुलिस अफसरों के पहुंचने के बाद ही बैठक शुरू की लेकिन इशारों ही इशारों में अफसरों की चुस्ती-फुर्ती के लिए अपनी नाराजगी भी प्रकट कर दी। लगभग ११ बजकर १० मिनट पर कांफ्रेंस हाल में मुख्यमंत्री डा.रमन, गृहमंत्री श्री कंवर, मुख्य सचिव पी.जॉय उम्मेन, प्रमुख सचिव (सीएम) बैजेंद्र कुमार, गृह सचिव एनके असवाल, विशेष सचिव अमन सिंह, डीजीपी विश्वरंजन, नक्सल आपरेशन एडीजी रामनिवास, एडीजी गिरधारी नायक, आईजी (इंटेलीजेंस) डीएम अवस्थी, आईजी आनंद तिवारी, आरके विज, आईजी मुकेश गुप्ता, डीआईजी नक्सल आपरेशन पवन देव, अरुण देव गौतम, राजकुमार देवांगन सहित अन्य अफसरों की मौजूदगी में बैठक शुरू हुई। मुख्यमंत्री श्री सिंह ने प्रदेश में बढ़ रही नक्सली घटनाओं को लेकर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने साफ शब्दों में पुलिस के एक्शन प्लान को कमजोर बताया। डाक्टर सिंह ने कहा कि नक्सली अपने हरकतों से सरकार को अस्थिर करने का षडय़ंत्र रच रहे हैं। पुलिस को चाहिए कि वह इसका मुंहतोड़ जवाब दे। उन्होंने अद्र्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए विशेष योजना तैयार करने के आदेश दिए। बैठक में मानपुर की घटना के बाद पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर भी उन्होंने डीजीपी विश्वरंजन और एडीजी नक्सल आपरेशन रामनिवास पर नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री ने बरसात के बाद नक्सल आपरेशन के लिए पुख्ता एक्शन प्लान बनाने कहा है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बैठक में मुख्यमंत्री श्री सिंह ने गृहमंत्री श्री कंवर की नाराजगी दूर करते हुए मुख्यालय स्तर पर फेरबदल के भी संकेत दिए हैं। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पूरे बैठक में गृहमंत्री मुख्यमंत्री डा.रमन की हर बात से सहमत नजर आए। उन्होंने कुछ खास तो नहीं कहा पर बैठक में मुख्यमंत्री के तेवर देखकर यह बात स्पष्ट हो गया कि श्री कंवर मुख्यालय की अफसरशाही से नाराज चल रहे हैं। इसे लेकर ही मुख्यमंत्री ने आकस्मिक बैठक लेकर आपसी मतभेद को दूर करने का प्रयास करने के साथ ही मनमानी करने वाले अफसरों को सीधे तौर पर संकेत दिया है कि अनुशासन में रहे।

मिनट टू मिनट कार्यक्रम१०:३० पर पीएचक्यू को मिली सूचना १०:५० मुख्यमंत्री और गृहमंत्री पहुंचे११:०० बजे डीजीपी के चेंबर से बाहर निकले११:१० कांफ्रेंस हाल में बैठक शुरू१:०० पौधरोपण कार्यक्रम रद्द १:३० वन विभाग की नर्सरी लौटा दिए गए पौधे२:०० बैठक के समय में इजाफा२:१० मैराथन बैठक समाप्तपुलिस को बेहतर बनाने बैठक : रमन मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह ने बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पुलिस में बेहतर सुधार के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में प्रदेश में कानून व्यवस्था के साथ ही नक्सल समस्या और पुलिस की समस्याओं को लेकर चर्चा की गई। अफसरों से भी उनकी परेशानियों की जानकारी ली गई। नक्सल समस्या से निपटने पुलिस के वरिष्ठ और अनुभवी अफसरों को योजना तैयार करने कहा गया है। थानों और चौकियों को मजबूत बनाया जाएगा। केंद्रीय बलों को किन क्षेत्रों में नियुक्त किया जाए इस पर भी चर्चा की गई है।

Thursday, July 30, 2009

नक्सली शहीद सप्ताह में पुलिस सतर्क


नक्सल प्रभावित बस्तर में माओवादी द्वारा मनाए जा रहे नक्सली शहीदी सप्ताह का पूरा असर देखा गया है। उद्योग घरानों का विरोध करने के साथ ही नक्सली अब रात्रि में चलने वाली यात्री बसों की तलाशी भी ले रहे हैं। नक्सलियों को शक है कि पुलिस किसी योजना के तहत उन तक पहुंच सकती है। यात्री बसों और निजी फोर व्हीलर वाहनों के लिए फरमान जारी करते हुए गाड़ी के भीतर की लाइट जलाए रखने का फरमान भी नक्सलियों ने जारी किया है। प्रदेश से लगे नक्सल प्रभावित उड़ीसा ,महाराष्ट्र के साथ साथ बस्तर संभाग में नक्सली शहीदी सप्ताह का असर छाया हुआ है। वर्दीधारी नक्सली किसी भी मोड़ और दूरस्थ इलाके में जंगल से निकल कर सामने आ जाते हैं। यात्री बस और आंध्रप्रदेश की ओर से आने वाले मालवाहक वाहनों को रोककर तलाशी ली जा रही है। यात्री बसों में सवार यात्रियों के जरिए वे अपना संदेश भी प्रचारित कर रहे हैं। पुलिस ने भी नक्सली पर्चे बरामद किया है। पर्चों में स्थानीय गोढ़ी और हल्बी भाषा का प्रयोग भी किया गया है। नक्सली अपनी शहीदी सप्ताह में पूरी तरह सर्तकता बरत रहे है। खुफिया तंत्र के मुताबिक प्रदेश में विधानसभा सत्र चलने और ३ अगस्त को नक्सली सप्ताह के समापन पर नक्सली कोई बड़ा धमाका कर सकते हैं। बाक्सनए क्षेत्रों में पुलिस एलर्ट शहीदी सप्ताह में नक्सल प्रभाव वाले नए इलाके रायपुर जिले के मैनपुर गरियाबंद,धमतरी जिले के नगरी, सिहावा,दुर्ग जिले के दल्लीराजहरा,कुम्हारी,चरौदा (कारतूस बरामदगी के इलाके ) राजनांदगांव के आउटर के जंगल में पुलिस सर्तकता बरत रही है।

Tuesday, July 28, 2009

सेना से नक्सलियों को बचाने मानवाधिकारों के ठेकेदार आगे आए


केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने छत्तीसगढ़, ङाारखंड, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश व महाराष्ट्र में काम कर रहे नक्सली संगठनों को निशाना बनाते हुए स्पष्ट शब्दों में सैन्य कार्रवाई करने का संकेत दिया है। सैन्य कार्रवाई की कल्पना से ही नक्सली समर्थक संगठनों में हड़कंप मचा हुआ है। डा.विनायक सेन को जेल से रिहा कराने के लिए बनी केंद्रीय समिति ने सैन्य कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन छेडऩे की घोषणा करते हुए नक्सलियों से शांतिवार्ता करने की मांग रखी है।देश के ११ राज्यों में नक्सलियों के पांव पसारने और पांच राज्यों में समानांतर सरकार चलाने के प्रयास को विफल करने के लिए केंद्र ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। खासतौर से लालगढ़ की घटना के बाद सरकार ने नक्सलियों को आतंकवादियों की Ÿोणी में रखा है। अब तक केंद्र इसे राज्य की समस्या मानती आई थी, लेकिन अब छत्तीसगढ़, उड़ीसा, ङाारखंड, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश में एकाधिकार रखने वाले नक्सलियों के खिलाफ कें्र ने सैन्य कार्रवाई की मानसिकता बना ली है। दूसरी ओर सरकार के इस कड़े कदम और कोबरा बटालियन की स्थापना को देखते हुए मानवाधिकार संगठनों ने आगे चलकर बड़े पैमाने पर नरसंहार होने की संभावना व्यक्त की है। सूत्रों के मुताबिक डा.विनायक सेन को रिहा कराने देश के सभी राज्यों में बनाई गई केंद्रीय समिति ने दिल्ली में बैठक का आयोजन किया है। इसमें छत्तीसगढ़, ङाारखंड व उड़ीसा के पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया है। जेल से रिहा होने के बाद पीयूसीएल के महासचिव डा.विनायक सेन भी इस बैठक में पहली बार शामिल हुए हैं। बैठक में मानवाधिकार संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा है कि सरकार द्वारा नक्सलियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से लाखों की संख्या में निर्दोष आदिवासियों की जान को खतरा है। सरकार नक्सलवाद को खत्म करने के लिए शांतिवार्ता आयोजित करे। नक्सल प्रभावित राज्यों में अद्र्धसैनिक बलों की कार्रवाई से पहले ही लाखों की संख्या में आदिवासियों को क्षति पहुंचाई जा चुकी है।बाक्सदिल्ली में भी सक्रिय अब तक दिल्ली में आईएसआई के एंजेट पकड़े जाते रहे हैं, वहीं पिछले महीने एक महिला नक्सली और नक्सली समर्थक पकड़े गए हैं। इनकी दिल्ली में उपस्थिति से हंगामा मचा हुआ है। दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार दर्जनों की संख्या में नक्सली समर्थक यहां मौजूद हैं, लेकिन इनके खिलाफ दिल्ली पुलिस के पास साक्ष्य नहीं है।

Saturday, July 25, 2009

उच्चान्यांयालय ने डीजीपी को जारी की नोटिस


हाईकोर्ट बिलासपुर ने नक्सल प्रभावित इलाके में सात साल सेवा देने के बाद फिर से नक्सल प्रभावित मानपुर भेज जाने के स्थांतरण आदेश के विरुद्ध एडिशनल एसपी एम आर आहिरे की याचिका पर गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय को नोटिस जारी किया है। मिली जानकारी के अनुसार १२ जुलाई को मानपुर इलाके में नक्सलियों ने राजनांदगांव एसपी विनोद कुमार चौबे पर घातक हमला कर दिया था। इस हमले में एसपी सहित २८ जवान शहीद हो गए थे। घटना के तत्काल बाद राजधानी के एडिशनल एसपी (यातायात)एम आर आहिरे को मानपुर एडिशनल एसपी के रुप में स्थातंरण कर दिया गया। श्री आहिरे हाल ही में नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में अपनी सेवा देकर लौटे थे। लगभग सात वर्षो तक वह बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में रहे थे। सूत्रों के मुताबिक श्री आहिरे ने हाईकोर्ट बिलासपुर में तबादला रुकवाने स्टे लगाया था। हाईकोर्ट ने गृह विभाग सहित डीजीपी विश्वरंजन को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट में स्थांतरण के विरुद्ध याचिका दायर करने वाले पहले पुलिस अधिकारी नहीं है। इससे पहले भी डीएसपी,इंस्पेक्टर,सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों ने तबादला के विरुद्ध स्टे लाया है।

छत्तीसगढ़ पुलिस की तबादला नीति पर उठी अंगुली

चुनाव के मद्देेनजर साल में दो बार राज्य पुलिस में हुए तबादलों पर भी ऊंगली उठनी शुरु हो गईं है। इन तबादलों में निरीक्षक, उपनिरीक्षक साहित सिपाही स्तर के कर्मचारियों को एक नक्सल प्रभावित जिले से दूसरे नक्सल प्रभावित जिले में भेज दिया गया था। जबकि मैदानी जिले में अर्से से पदस्थ अधिकारी,कर्मचारी सुरक्षित जिलों में ही भेजे गए थे। कृपापात्र कर्मचारी अधिकारी दस वर्ष की नौकरी के बावजूद अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नहीं भेजे गए हैं। जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस जवान मायूस हैं। उनका मनोबल लगतार गिर रहा है। जो पुलिस की तबादला नीति को कटघरे में खड़ा करता है। गौरतलब है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लगने से पहले थोक में इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, हवलदार, सिपाही आदि के तबादले किए गए थे। जानकारी के मुताबिक इन तबादलों में नक्सल प्रभावित इलाके के अधिकारी कर्मचारियों को गैर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नहीं भेजा गया, बल्कि नेताओं द्वारा पसंद के पुलिस अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में पदस्थ कराया गया। लोकसभा चुनाव के समय भी आचार संहिता लगने से पहले हुए तबादलों में भी यह खेल जारी रहा। इसमें स्पष्ट नजर आता है कि मैदानी इलाके में पदस्थ पुलिस अधिकारी दूसरे मैदानी जिलों में स्थांतरित किए गए। इस दौरान सूची में भी गड़बड़ी की बात भी सामने आई जब नक्सल प्रभावित जिले से वापस बुलाकर मैदानी जिले में भेजे गए अधिकारी फिर से नक्सली जिले में स्थांतरित कर दिये गये। इनमे से अधिकांश ने प्रशासन शाखा में गुजरिश आवेदन लगाया और कुछ ने कोर्ट जाकर स्टे लाने का जुगाड़ किया। बहारहाल इस भेदभाव पूर्ण नीति के शिकार होने वालों की संख्या ज्यादा है। हाल ही में पूर्व गृह मंत्री नंद कुमार पटेल ने आरोप लगाया है कि पुलिस महकमें में दरबारी पुलिस मैदानी क्षेत्रों में वर्षो से जमे हुए है। हालांकि अविभाजित छत्तीसगढ़ में भी वह गृह मंत्री रहते हुए छत्तीसगढ़ के कई अधिकारियों को नक्सल प्रभावित बस्तर और सरगुजा संभाग में नहीं भेज पाए थे।
मैदानी जिले
रायपुर से दुर्ग,बिलासपुर से कोरबा,रायगढ़ से महासमुंद,धमतरी से रायपुर,जांजगीर चांपा से कर्वधा।
नक्सल प्राभावित जिले
सूरजपुर,नारायणपुर से बलरामपुर,जगदलपुर से कांकेर, सरगुजा से बीजापुर दंतेवाड़ा से बस्तर राजनंदगांव से कांकेर आईबी की नजर नक्सल प्रभावित इलाकों में सजा बतौर भेजे जाने वाले अधिकारियों की बदली मानसिकता पर अब केन्द्रीय खुफिया तंत्र ने भी नजर रखना शुरु कर दिया है। इनमें वे अधिकारी शामिल हैं जिन्होंने नौकरी छोडने यह कोर्ट से स्टे लाने का प्रयास शुरु कर दिया है। अब यह भी माना जा रहा है कि हताश हो चुके अधिकारी कर्मचारी की फौज नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात कर नक्सल समस्या को बढ़ाया जा रहा है। इसके शिकार सीआरपीएफ के अधिकारी और जवान भी हो रहे है।

Friday, July 17, 2009

लोहा खदान की सुरक्षा में जुटा था मुख्यालय


मानपुर इलाके में स्थित पल्लामाड़ लोहा खदान एक निजी कंपनी को सौपे जाने के बाद से नक्सलियों ने इसे बंद करवाने का फरमान जारी किया था। वहीं उच्चस्तरीय आदेश के तहत पुलिस मुख्यालय लोहा खदान की सुरक्षा में जुटा हुआ था। चौकी खुलवाकर और कैंप लगाकर किसी भी तरह नक्सलियों से निपटने के लिए तैयार था। लेकिन राजनंदगांव के उच्चाधिकारी बल की कमी को देखते हुए यहां कैंप लगाने और चौकी खोलने के पक्ष में शुरु से नहीं थे। एसपी विनोद कुमार चौबे की शहादत के बाद विभाग में चल रहे अफसरशाही का मामला एक के बाद एक कर उजागर होता जा रहा है। पुलिस मुख्यालय में बैठे आला अफसरों को मालूम था कि पल्लामाड़ में लगाए गए लोहा खदान का नक्सली पोरा जोर विरोध कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा खदान के प्रदुषण से वहां के खेतखलिहान को बरबाद किए जाने आरोप भी लगाया जाता रहा। इस विरोध को दबाने के लिए वहां पुलिस की चौकी और कैंप लगाए जाने का मुख्यालय ने आदेश जारी किया था। मुख्यालय के एसी कमरो में रिर्मोट दबाकर कागजों पर नक्सली हमले का एक्शन प्लान बनाने वाले अफसरों की पोल धमतरी और राजनंदगांव की घटना के बाद एक एक कर खोल रही है। हालांकि धमतरी की घटना के समय डीजीपी अनिल एम नवानी पर टिकारा फोड़ा गया था। इस घटना के बाद डीजीपी विश्वरंजन को छुट्टी से वापस बुलाकर फिर से ज्वाइनिंग दिलाई गई थी। लेकिन दो महीने बाद भी कागजों पर योजना तैयार करने के अलावा कोई विशेष कार्य नहीं हो पाया। राजनंदगांव एसपी विनोद कुमार चौबे मदनगढ़ चौकी खोले जाने के पक्ष में नहीं थे। उन्हें अर्ध सैनिक बल की संख्या को देखते हुए चौकी खोलने पर एतराज किया था। इस प्रभावित क्षेत्र खडग़ांव चौकी प्रभारी ने बल की कमी को देखते हुए चौकी जाना ही छोड़ दिया था। जिसकी विभागीय जांच भी की जा रही है। बहारहाल नक्सली मानपुर डिविजन में लोकसभा चुनाव के समय से ही पर्चा बांटकर गांव गांव में सभा ले रहे थे। पुलिस के उच्चाधिकारी भी इस बात से इंकार नहीं कर सकते है। इस घटना के बाद भी भाकपा मानपुर ने लोहा खदान का विरोध जारी रखा है। बाक्स लिट्टे की ट्रेनिंग थी नक्सलियों के पास राज्य पुलिस के उच्चाधिकारी भले ही घटना स्थल पर अब तक नहीं पहुंचे है। लेकिन केन्द्रीय खुफिया तंत्र ने इस पूरी घटना के तौर तरीके पर लिट्टे की ट्रेनिंग का हवाला दिया है। एक लंबे समय से यह अनुमान लगाया जाता रहा है कि ८० के दशक में नक्सली कमांडरों ने लिट्टे से ट्रेनिंग प्राप्त की थी। हालांकि इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है। लेकिन नक्सलियों की मिलिट्री कमीशन के पास लिट्टे की समकक्ष ट्रेनिंग होने की पुष्टि होती रही है। भले गैर जानकार अफसर बार बार इस हमले में गुरिल्ला वार का हवाला दे रहे है। लेकिन दोनो ओर से घेरा बंदी कर की गई गोलीबारी लिट्टे की प्रसिद्ध चीता युद्ध की पहचान हैं। इसकी ट्रेनिंग लिट्टे के लड़ाके (तमिल चीते) के पास थी। आईजी गुप्ता की पृष्ठभूमि की जांच होपीसीसी अध्यक्ष धनें्र साहू ने मानपूर से लौटकर पूरे मामले में दुर्ग आई जी मुकेश गुप्ता की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच की है।

Wednesday, July 15, 2009

डीजीपी पढ़ रहे कविताये नक्सली खेल रहे खून की होली

नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक समेत ३० जवानों की जान लेकर एक बार फिर राज्य में अपनी मजबूत स्थिति का एहसास करा दिया है। नक्सलियों ने पिछले साढ़े चार सालों में लगभग १३०० लोगों के जीवन से खूनी खेल खेला है। जसमें पुलिसकर्मीं, विशेष पुलिस अधिकारी और आम नागरिक शामिल हैं।करीब तीन दशक पहले शुरू हुआ नक्सलियों का तांडव अब नासूर बन गया है। जैसे-जैसे समय गुजरता गया नक्सली कमजोर होने की बजाय मजबूत होते गये हैं। प्रदेश सरकार मुखिया डॉ. रमन सिंह के नक्सलियों के विरुद्ध बेहद सख्त होने के बावजूद अब तक विशेष सफलता नहीं मिली है जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यकुशलता पर प्रश्रचिन्ह लगने लगा है। कुछ अधिकारियों को छोड़ जिनके नेतृत्व में यह लड़ाई लड़ी जा रही है उनमें इच्छाशक्ति की कमी दिखाई देती है। पुलिस मुखिया के कार्यकलापों पर नजर दौड़ाएं तो वे अपने साथ दो दर्जन से अधिक पुलिस कर्मचारियों की फौज के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और साहित्यिक सम्मेलनों में ही नजर आते हैं। जबकि उन्हें नक्सलवाद के खिलाफ जंग लडऩे वाला मजबूत अधिकारी मानकर इस पद पर बिठाया गया था। यदि आंकड़ो पर गौर करें तो उनके पुलिस निदेशक बनने के बाद नक्सली हमलों में तेजी आई है। विगत साढ़े चार वर्षो में नक्सली लड़ाई की भेंट चढ़ी लगभग १३०० जानों में से ज्यादतर विगत दो वर्षाे में गई हैं। कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी डीजीपी के विरुद्ध जा रहे हैं। इनमें से एक विधानसभा चुनाव के समय तत्कालीन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आलोक शुक्ला के साथ दंतेवाड़ा जिले में चुनाव सम्पन्न कराने के संबंध में हुई चर्चा में डीजीपी विश्वरंजन का जबाव भी है। जिसमें उन्होंने पहाडिय़ों पर तीन सौ नक्सलियों की मौजूदगी की बात तो स्वीकारी थी लेकिन उनके विरुद्ध कोई अभियान नहीं चलाया था। पुलिस महानिदेशक की कार्यप्रणाली से स्वयं गृहमंत्री भी असंतुष्ट हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मौजूदा पुलिस नेतृत्व में नक्सलियों के विरुद्ध प्रभावी लड़ाई लड़े जाने में आशंका जताई है। बस्तर सांसद बलीराम कश्यप ने तो डीजीपी को असफल करार कर दिया है। उन्होंने राजनांदगांव की घटना के बाद असंतोष जाहिर किया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता रविं्र चौबे भी सार्वजनिक रूप से पुलिस महानिदेशक की योग्यता पर प्रश्र चिन्ह लगाते हुए कानून व्यवस्था की चिंता करने की बजाय उनके अन्य कार्यों में व्यस्त रहने पर रोष प्रकट कर चुके हैं। चार वर्षों में गई तेरह सौ जानेंवर्ष २००५ से लेकर अब तक १३०० से अधिक जाने गई हैं। इनमें ३६० पुलिसकर्मी, १४३ विशेष पुलिस अधिकारी व ७९३ आम नागरिक शामिल हैं। इस दौरान पुलिस ने २८१ नक्सलियों को मार गिराया व ६३७ को गिरफ्तार किया है। नक्सलियों ने इसी वर्ष के मात्र छह माह में सौ से ज्यादा पुलिसकर्मियों और विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) की जान ली है। अब तक विभिन्न नक्सली घटनाओं में ८६ पुलिसकमियों और १५ एसपीओ जान गई है। १० अप्रैल को दंतेवाड़ा जिले में सीआरपीएफ के गश्ती दल पर नक्सली हमला ,दस पुलिस कर्मी शहीद ,सात अन्य घायल। लोकसभा मतदान के दौरान राजनांदगांव जिले में बारूदी सुरंग में विस्फोट कर मतदान दल के पांच अधिकारियों की हत्या, व केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दो जवानों को गोली मार दी। छह मई को दंतेवाड़ा जिले में हमला किया और बारूदी सुरंग में विस्फोट कर ट्रेक्टर को उड़ाया, दो सीआरपीएफ के जवान और पांच एसपीओ समेत ११ लोग शहीद, धमतरी जिले में ११ मई को पुलिस वाहन को उड़ाया, १२ पुलिसकर्मी शहीद, सात अन्य घायल, २० जून को दंतेवाड़ा जिले में बारूदी सुरंग में विस्फोट कर ट्रक को उड़ाया, सीआरपीएफ के ११ जवान शहीद, ११ अन्य घायल। इन आंकड़ों में मारे गए गोपनीय सैनिक या सरकारी कर्मचारी शामिल नहीं है।

Monday, July 6, 2009

नक्सल आपरेशन,हाईटेक होगे जवान.


रायपुर नक्सल आपरेशन में लगे जवानों को हाइटेक करने की योजना केन्द्रीय गृह विभाग के नक्सल सेल ने बनाई है। जिसमें नक्सल इलाके में तैनात राज्य पुलिस के जवान भी शामिल रहेगें। इसके लिए बुलेट प्रूफ जैकेट और सेटेलाइट सेल फोन देने की तैयारी की जा रही है। नक्सल आपरेशन में लगे जवानों को हाइटेक करने की योजना पर अमल बस्तर संभाग में तैनात फोर्स से शुरु की जाएगी। ङाारखंड,उड़ीसा,महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित इलाकों में फोर्स को अत्यधिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। वहीं बस्तर संभाग में घने जंगलो और ऊंचे पहाडिय़ों के बीच विकराल समस्या से गुजरना पड़ता है। यहां सर्चिग के दौरान फोर्स का संर्पक तंत्र टूट जाता है। इसका भरपूर फायदा नक्सली उठाते है। अन्य राज्यों के मुकाबले नक्सली सबसे ज्यादा हमले बस्तर में करते है। नक्सलियों से मुठभेड़ के समय सही पोजीशन (छुपने का स्थान) नहीं मिल पाता है। इस कारण जवान गोलीबारी के शिकार हो जाते हंै। नक्सल आपरेशन विशेषज्ञों ने माना कि विस्फोट के साथ ही नक्सली चारो तरफ से गोलीबारी शुरु कर देते हैं। इस दौरान फोर्स को संभालने का मौका नहीं मिलता है। ऐसी घटनाओं को देखते हुए आपरेशन में जाने वाले जवानों को बुसे पहले फोर्स को जो जैकेट मिलता था। उसका वजन ज्यादा रहता था। इससे जवान सर्चिग के दौरान थक जाते थे। राज्य पुलिस न्लेट प्रूफ जैकेट देने की योजना बनाई गई है। इसो भी अपने स्तर पर खरीदी के लिए प्रयास शुरु कर दी है। बुलेट प्रूफ का उपयोग एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) के जवान भी करेगें। अधिकारिक सूत्रो के मुताबिक लगातार केन्द्रीय गृह विभाग के नक्सल सेल द्वारा नक्सल प्रभावित राज्यों के गृह मंत्री व पुलिस प्रमुखों से बैठक होते रहती है। जिसमें ऐसी योजना तैयार की गई है। बाक्सहाइटेक कर ज्वाइंट आपरेशन ,डीजीपी डीजीपी विश्वरंजन ने बताया कि बस्तर में तैनात अर्धसैनिक बल और जिला बल अपने अपने थाना क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाते हंै। केन्द्रीय गृह विभाग ने फोर्स को हाइटेक करने की योजना पर काम शुरु कर दिया है।बाक्सफोर्स के लिए वरदान बस्तर में तैनात फोर्स को नक्सली अक्सर घने जंगल में ही घेराबंदी कर मात दे पाते हैं। लेकिन सेटेलाइट फोन और हल्के वजन वाली बुलेट प्रूफ जैकेट जवानों के लिए वरदान साबित होगी। सेटेलाइट के जरिए वह दिशा ज्ञान के साथ साथ अपने दूसरे साथियों को भी मदद के लिए बुला पाएगें।

Friday, July 3, 2009

बारिश थमी तो नक्सली करेंगे अटेक


प्रदेश में इस बार बारिश कम होने की संभावना है। इससे यह अनुमान है कि नक्सली हमलों में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। नक्सल आपरेशन से जुड़ेअधिकारियों का मानना है कि बरसात के तीन महीने नक्सली चुप बैठते हैं। इसके पीछे बस्तर के नदी नालो में उफान और जंगलो में पानी भर जाना है। यहां इस मौसम में मलेरिया और डायरिया जैसे संक्रामक बीमारी फैल जाती है। लेकिन इस बार बरसात नहीं होने पर नक्सलियों को हमला करने में आसानी होगी। पुलिस मुख्यालय में इसे लेकर एक गोपनीय बैठक भी हुई है। प्रदेश में इस बार मानसून विलंब से आने के कारण नक्सली गतिविधियां जून के पूरे महीने जारी रही। बीते वर्षो में बारिश के साथ ही नक्सली गतिविधियां मानसून आने के साथ ही थम जाती थी। बस्तर के अधिकांश इलाकों में पानी भर जाता है। इस बार बारिश कम होने पर नक्सली हमला तेज कर सकते हैं,उन्हें बारुदी सुरंग बिछाने और नदी नाले के पास कैंप करने में आसानी होगी। गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में नक्सल आपरेशन से जुड़े अफसरों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें खासतौर से बस्तर आईजी टीजे लांगकुमेर उपस्थित थे। हालांकि मुख्यालय के अफसरो ने इसे रुटीन बैठक कहा है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में मौसम वैज्ञानिकों की भी मदद ली गई है। जिसमे इस महीने मानसून आने से लेकर तेज वर्षा वाले दिनों का आंकलन कर हिसाब लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक एक सप्ताह की तेज बारिश में ही बस्तर का जंगल लबालब भर जाता है। वन ग्रामों में इसके बाद वाइरल फीवर ,डायरिया और मलेरिया जैसे बीमारी फैल जाती हैं। मच्छरों के प्रकोप से वहां तैनात फोर्स भी हलाकान रहता है। नक्सली भी इस कुदरती मार से अपने को बचने के लिए मैदानी क्षेत्रों की शरण लेते हैं। बाक्स नदी नाले में उफान के साथ सर्चिग बंद अधिकारी सीधे तौर पर नहीं स्वीकारते लेकिन बारिश के महीने में नदी नाले में उफान आते ही सर्चिग बंद रहती है। वहीं नक्सली भी इस मौसम में बारुदी सुंरग बिछा पाने में असहाय रहते है। जिससे बड़े विस्फोट के मामले भी नहीं होते है। प्रदेश में २००१ के बाद पहली बार बारिश कम हुई है। बाक्समानसून सत्र हो सकती है बड़ी घटना नक्सल मामलों के विशेषज्ञों का अनुमान है कि नक्सली अपनी ताकत दिखाने किसी भी बड़े अवसर पर धमाका करते हैं। इससे अगामी सप्ताह तक किसी बड़े नक्सली घटना की संभावना है। इसे देखते हुए फोर्स को सचेत रहने कहा गया है।बाक्सअब दिल्ली भी अर्लट केन्द्र सरकार द्वारा आंध्रप्रदेश,उड़ीसा,छत्तीसगढ़ ,ङाारखंड,महाराष्ट्र में नक्सलियों से सीधे युद्ध छेडऩे की घोषणा के बाद खुफिया विभाग ने दिल्ली में भी सर्तकता बरतने की सलाह दी है। दो सप्ताह पूर्व एक महिला नक्सली दिल्ली में नक्सली पर्चे के साथ गिरफ्तार की गई थी।

Sunday, June 28, 2009

नक्सल समस्या से निपटने के पॉँच मंत्र

राज्यपाल ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान अफसरों की बैठक लेकर नक्सल समास्या से निपटने के लिए पांच मंत्र दिए है। जिससे बस्तरवासियों को खुशहाल बनाकर नक्सल समास्या को खत्म किया जा सके। इसके लिए उन्होंने बस्तर में लोक सुरक्षा, अन्न सुरक्षा सहित शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार पर ज्यादा बल देने का निर्देश दिया है। राज्यपाल ई.एस.एल.नरसिम्हन ने बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि अंचल में आम जनता की सुरक्षा, सुरक्षा सहित शिक्षा,स्वास्थ्य और सतत् रोजगार की उपलब्धता सुनिश्चित कराये जाने,पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति की यह पांच जरूरतें पूरी हो जाय तो वह खुशहाल रहेगा। उन्होंने प्रदेश को आगे बढ़ाने में बस्तर में काम कर रहे सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अत्यंत कठिन और विषम परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। राज्यपाल ने अधिकारियों से उनके विभाग के बारे में जानकारी ली जिसमें आदिम जाति कल्याण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग,स्वास्थ्य विभाग,पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग,विद्युत वितरण कम्पनी,चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा,वन विभाग और वन अधिकार मान्यता पत्रों के वितरण की स्थिति, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और शिक्षा विभाग से जुड़े हुए महत्वपूर्ण विषयों पर अंचल में संचालित इन विभागों की योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी शामिल थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश और केन्द्र शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को गरीबों के हित में अधिक से अधिक क्रियान्वित कर उन्हें लाभान्वित करना हमारा उद्देश्य होना चाहिये।राज्यपाल ने अधिकारियों से कहा है कि वे सिर्फ ऑफिस में बैठकर काम करने तक सीमित न रहें,बल्कि वे गांवों में जाकर ग्रामवासियों से मुलाकात करें। गरीबों का चावल चोरी न हो इसका विशेष ध्यान रखें। वन अधिकार मान्यता पत्र के पात्र हितग्राहियों को जिस जमीन का उपयोग करने के लिए अधिकार पत्र दिया गया है,ऐसे हितग्राहियों की जमीन पर किसी भी स्थिति में भू-माफिया की नजर न लगे उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और चिकित्सा सेवाओं के विस्तारीकरण की भी जानकारी ली। शिक्षा की गुणवत्ता, पाठ्यपुस्तक वितरण और मध्यान्ह भोजन सहित सायकल वितरण, गणवेश वितरण तथा कम्प्यूटर शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि संबंधित शिक्षा और आदिम जाति कल्याण विभाग, राजीव गांधी शिक्षा मिशन के लोग गंभीरता पूर्वक काम करें।

Tuesday, June 16, 2009

समाज भी नक्सली पैदा करता है

समाज में मिलने वाली व्यवस्था भी नक्सली पैदा करता है .मै और विकाश शर्मा एक पुलिस के एक वरिष्ठ अफसर के साथ बैठकर विचार विमर्श कर रहे थे ,ने आपने वेतन में विस्गति होने पर आपना दुखडा रोते हुए कहा दिया ,मंत्रलय में उनके जैसे अफसर कोचक्कर कटते ७ साल हो गया ,कभी सोचा आपके राज्य में नक्सली कैसे आ गए , मेरे बिना उत्तर दिए ही वह आगे बोलने लग गए अनपढ़ को नियम सिखा का कर उसका दुःख और बड़ा रहे है, फ़िर क्यो ने नक्सली उन्हें शोषण का पाठ नही पड़ाऐगे मै चुप था ,

Friday, June 12, 2009

बस्तर के आबुझ्मद में अब घुसेगी पुलिस

देश और प्रदेश में रहस्मय रहे बस्तर के अबुझ्मद में अब सरकार विकाश के रास्ते प्रवेश करने वाली है ,नक्सल विरोधी आन्दोलन से जुड़े डॉ उदयभान चोहन ने कहा की सरकार के इस फैसले का स्वागत करते है ,लेकिन सरकार को आदिवासियों की सस्कृति का ख्याल रखना होगा,नही तो नक्सली आदिवासियों की एक बार फ़िर रहनुमा बन जायेगी ,नक्सली यहाँ पिछले २० वर्षो से आपना हेड क्वाटर बना रखे है,इसकी जानकारी खुफिया तंत्र ने सरकार को काफी लबे समय से दे राखी है ,

Tuesday, June 9, 2009

लोकतंत्र के दरवाजे पर खड़ा बौद्ध






१९९० में मध्यप्रदेश के बस्तर संभाग में जब नक्सलवाद धीरे धीरे अपने पांव पसारते हुए पूरे छत्तीसगढ़ आंचल में छाने की मुहिम चला रहा था। ऐसे में हरियाणा का एक नौजवान यहां भानुप्रतापपुर एसडीओपी के रुप में पदस्थ हुआ। सीधे साधे भोले भाले अधनंगे आदिवासियों के बीच उसने एक अजीब सी शांति पाई। उसे लगा शांति का मसीहा बौद्ध इन्हीं के बीच मौजूद रहता है। ऐसे में माओ का हिंसक आंदोलन इनके बीच ज्यादा समय सांस नहीं ले पाएगा। भटके हुए लोग बहुत जल्द इस शांत समाज में लौट आएगें। कुछ समय बाद उन्हें परिवारिक कारणवश यहां से लौटना पड़ा। बस्तर की शांति और बौद्ध उन्हें याद आता रहा। १९९४ में ग्वालियर में कमांडेट रहते हुए उन्होंने अपनी पहली पदस्थापना को याद करते हुए गौतम बौद्ध की पेंटिग बनाई। छह साल बाद छत्तीसगढ़ राज्य के अस्तिव में आते ही बटवारे मे यहां चले आए उनके साथ बौद्ध की पेंटिग भी साथ आ गई। लेकिन शांत माने जाने वाला छत्तीसगढ़ इन दस सालो में काफी बदल चुका था। शायद शांति के पुजारी बौद्ध को पूजने वाले अब यहां नहीं थे और बौद्ध के चहेरे से भी मुस्काराहट गायब थी। नक्सलवाद ने यहां की धरती पर नरसंहार कर लाल ङांडा लहराने में तो कामयाबी हासिल नहीं की बल्कि धरती को निर्दोष ग्रामीण और उनकी सुरक्षा में लगे पुलिस जवानो के खून से लाल जरुर कर दिया था। पुलिस मुख्यालय में डीआईजी से आईजी के रुप में पदोन्नत होते ही राजेन्द्र विज की पोस्टिंग बस्तर रेंज में हुई। प्राकृतिक प्रेम ने उन्हें एक बार फिर बस्तर की वादियों में बुला लिया था। लेकिन बस्तर इस बार बदला हुआ था। पिछले पन्द्रह वर्षो में बस्तर अपनी शांति लूटा चुका था। नक्सलियों के बारुदी विस्फोट की दुर्गंध बस्तर की हरियाली में चारो ओर फैली हुई थी। ऐसे में गौतम बौद्ध और महात्मा गांधी के आदर्श पर चलने वाला व्यक्ति क्या कर सकता है। क्या एक गाल पर थप्पड़ मारने पर दूसरा गाल सामने कर देगा। श्री विज ने कहा कि ऐसा भी संभव था जब वह व्यक्ति समाज में जीता हो लोकतंत्र पर विश्वास रखता हो। उसे बेशक समाज में लौटने के लिए आग्रह किया जा सकता है। लेकिन यहां लोकतंत्र की हत्या हो चुकी थी। गांधीगिरी सिर्फ उस व्यक्ति के साथ किया जाना चाहिए जो समाज में जीता है। भटक गया हो इस समाज में वापस लौटना चाहता हो। लेकिन जिसे इस अहिसंक समाज में जीना ही नहीं है। बंदूक के दम पर खूनबहाकर भय और दहशत का सम्राज्य स्थापित करना है। उससे गांधीगिरी नहीं की जा सकती है। अब भी समय है कांलिग युद्ध का नरसंहार,बस्तर के नरसंहार के सामने कमजोर हो चुका है। समाज में लौटा जा सकता है। लोकतंत्र के तरीके अपनाए जा सकते है। अन्याय के विरोध में महात्मा गांधी द्वारा बनाए गए व्यवस्था के तहत आंदोलन छेड़े जा सकते है। किसी ने नहीं रोका है उन भटके हुए लोगो को बौद्ध अब भी लोकतंत्र के दरवाजे में खड़ा पट खोलकर उनका इंतजार कर रहा है। बस्तर से लौटने के बाद एक बार फिर १४ साल बाद अपै्रल २००९ को सलवा जुड़ूम पर लिखते हुए आईजी विज ने अपने विचार कैनवास पर उतारे हैं। उनकी उंगलिया आड़ी तिरक्षी लकीरो पर फिर खेलने लगी और बापू का एक हंसता मुस्कारता चहेरा कुछ घंटो बाद सामने था। उन्होंने मुस्काराते हुए बड़ी गंभीरता से कहा कि यह उनकी पेंटिग नहीं विचार है। प्रदेश और देश को ही नहीं पूरे विश्व को एक बार फिर बौद्ध और बापू का इंतजार है।

Thursday, May 28, 2009

अंधविश्वासजनित रोकने 20 हज़ार स्वयंसेवी कार्यकर्ता - विश्वरंजन


हर ग्राम से एक कार्यकर्ता होंगे तैयार
रायपुर । सामाजिक अपराध और अमानवीय गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले प्रचलित अंधविश्वासों से प्रदेश को मुक्त करने के लिए राज्य के हर गाँव से एक-एक कार्यकर्ता को छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशिक्षित करने जा रही है । ये प्रशिक्षित कार्यकर्ता अपने-अपने गाँव में पांरपरिक रूप से प्रचलित अंधविश्वासों, जैसे इनमें टोनही, डायन, झाड़-फूँक की आड़ में ठगी, धन दोगूना करने की चालाकिय
ों, गड़े धन निकालने, शारीरिक, मानसिक आपदाओं को हल करने के लिए गंडे ताबीज, चमत्कारिक पत्थर एवं छद्म औषधियों का प्रयोग कर धन कमाने आदि गतिविधियों, घटनाओं के पीछे की जाने वाली चालाकियों एवं ट्रिक्स की वैज्ञानिक व्याख्या कर प्रायोगिक प्रदर्शन कर जनजागरण करेंगे । ज्ञातव्य हो कि पुलिस महानिदेशक श्री विश्वरंजन की विशेष सामाजिक पहल पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने वर्ष 2009 में टोनही प्रकरणों की दर को शून्य पर स्थिर करने तथा अंधविश्वास आधारित अपराधों के नियंत्रण हेतु विशेष अभियान प्रारंभ किया है ।
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि राज्य में संचालित इस अभियान में लगभग 20,000 (बीस हज़ार) स्वयंसेवी कार्यकर्ता प्रशिक्षित होकर अंधविश्वासजनित अपराधों को रोकने में प्रमुख भूमिका निभायेंगे । प्रथम चरण में 19 जिलों से चयनित 200 जिला स्त्रोत प्रशिक्षकों को देश-विदेश में वैज्ञानिक तरीकों से अंधश्रद्धा उन्मूलन के लिए प्रसिद्ध संस्था नागपुर एवं पटना की सामाजिक संस्था द्वारा दो दिवसीय प्रशिक्षण रायपुर में दिलाया जायेगा । ये जिला स्त्रोत प्रशिक्षक पुलिस अधीक्षक एवं जिला टास्क फ़ोर्स के अध्यक्ष द्वारा चयनित पुलिस अधिकारी एवं स्वयंसेवी कार्यकर्ता होंगे । द्वितीय चरण में ये 200 प्रशिक्षित जिला स्त्रोत प्रशिक्षक 19 जिलों के प्रत्येक अनुविभाग स्तर पर 10-10 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे । ये अनुविभाग के अंतर्गत आने वाले पुलिस कर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता, महिला संगठन के सदस्य, कलाकार, समाजसेवी होंगे । अनुविभाग स्तर पर प्रशिक्षित ट्रेनर्स अपने अनुविभाग के अधीन सभी थानों के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक ग्राम से 1-1 स्वयंसेवी कार्यकर्ता को दक्ष करेंगे । ये स्वयंसेवी कार्यकर्ता ग्राम कोटवार, युवा /महिला संगठन के सदस्य, लोक कलाकार आदि होंगे जिनका चिन्हाँकन थानेदार द्वारा किया जायेगा । इस तरह से कुल 19744 अर्थात् 20,000 कार्यकर्ता वैज्ञानिक चेतना, ट्रिक्स एवं उन चालाकियों से ग्रामीणों को परिचित करायेंगे ताकि टोनही आदि कई अंधविश्वासों से अपराधों को बल न मिले । इसके अलावा प्रत्येक मेले, मडई, शिविरों आदि में वैज्ञानिक ट्रिक्स से अंधविश्वास के बचने के लिए विशेष आयोजन भी करेंगे । ये प्रशिक्षित स्वयंसेवक कार्यकर्ता विशेष तौर पर टोनही, डायन के साथ-साथ अंधश्रद्धा के दुष्परिणामों की रोकथाम के लिए कई तरह के प्रावधानित कानून जैसे - औषधि और जादू उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1955, भारतीय दंड संहिता ( धारा 420 एवं अन्य), तथा छत्तीसगढ़ में विशेष तौर पर टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम-2005 आदि की जानकारी भी गाँव-गाँव में देंगे, ऐन वक्त पर अपराधों को रोकने के लिए पुलिस को संसूचित करेंगे ताकि अनहोनी और अप्रिय घटनाओं, अपराधों समय रहते ही को टाला जा सके ।

Friday, May 22, 2009

राजभवन में नक्सल जिले के पुलिस अफसरों की बैठक

राज्यपाल श्री नरसिम्हन ने शुक्रवार २२ मई को राजभवन में बैटक लेकर पुलिस अफसरों से नक्सल समस्या पर चर्चा की जिसमे राज्य में नक्सलियों की विस्तार निति को फ़ैल करने की योजना बनी है,बैटक में डीजीपी विश्व रंजन ,आई जी (बस्तर ) लांग कुमेर भी शामिल हुए , गौरतलब है की १० मई को धमतरी में हुए नक्सली विस्फोट में मरे गए १३ जवानो की मौत के बाद राज्यपाल पुलिस की कार्य प्रद्ली से नाराज चल रहे है ,

Sunday, May 17, 2009

छ ग में १ साल में नक्सल ख़त्म नही तो इस्तीफा

ग्रह मंत्री ननकीराम कवर ने प्रदेश में नक्सल वाद खत्म नही होने पर १ साल में इस्तीफा देने की घोषणा की है , गौरतलब है की ९ मई 2009 की रात धमतरी के नगरी में हुए नक्सली विस्फोट ओउर १३ जवानओ के शहीद होने के बाद श्री कवर १३ मई राज्यपाल से मिलने गए थे, इस मामले में धमतरी ओउर कांकेर पुलिस की लापरवाही खुलकर सामने आई है, इस मामले में राज्यपाल ने डीजीपी अनिल एम् नवानी ,होम सेक्टरी एन के आसवाल ,डीआई जी (नक्सल आप्रेसन) पवन देव ,एस टीऍफ़ डीआईजी कर्नल रजनेश शर्मा ,एसपी अभिषेक पाठक,धमतरी एसपी नेहा चम्पावत की क्लास ली थी , पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है,

Sunday, May 10, 2009

नक्सलियों से सीधी लडाई डॉ.रमन सिंह

छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने ८ मई को राज्य पुलिस के आला अफसरों की बैठक लेकर नक्सलियों से आरपार की लडाई करने की घोषणा कर दी है ,बैठक में गृह मंत्री ननकीराम कंवर भी शमिल हुए थे,सरकार ने काफी समय बाद रुख कदा किया है ,गोरतलब है की नक्सलियों ने १५ दिनों से लगतार नक्सली घटनाओ को अंजाम देना शुरू कर दिया है ,

Thursday, April 2, 2009

माडल की हत्या प्रेमी ने की पत्नी के साथ गिरफ्तार

१मार्च २००९ को अपने घर मोवा रायपुर से निकली छत्तीग फ़िल्म की हिरोइन माडल दिव्या साहू (२५ वर्ष ) २ दिनों तक घर नही पहुची तो उसके पिता ने पंडरी पुलिस थाना में गुमासुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई ,लेकिन उशका कोई सुराग नही मिला , पुलिस ने इस मामले में उश्के प्रेमी बार संचालक प्रीतम खनुजा से पुछ्तास की तो उसने भी दिव्या ओर अपनी शादी होने की जानकारी देकर चिंता जताई ,उसने दिव्या की खोज भी की धीरे- धीरे बात फैलाने लगी दुसरे कलाकारों के बीच चर्चा होने लगी ,घूमफिरकर बार संचालक प्रेमी प्रीतम पर शक होने लगा लेकिन पुलिस के पास कोई साबुत नही था ,बार स्चाल्क पहले से ही शादी शुदा था ,लेकिन पत्नी से भी तालाक हो गया था ,इस दोरान सीएसपी मनीष पोर्निक को राज्न्दा गाँव में एक जली हुई लाश

Wednesday, April 1, 2009

लोक सभा में छ ग को मिले ८५ कपनी

छतीसग को लोकसभा चुनाओ में केन्द्र ने ८५ कपंनी दी है,२५ मार्चःसे सी आरपीऍफ़ बीएसऍफ़, सिक्कम सिक्यूरिटी फोर्स ,तिब्बत सीमा पुलिस ,रेलवे पुलिस फोर्स ,की कपंनी पहुचना सुरु हो गई है,इन्हे नक्सली प्रभावित इलाको में तैनात किया जाएगा,१० अप्रेल तक सभी मतदान केंद्रों में बल पहुच जायगा,इसके लिए १० हैलीकाप्टर किराय पर लिए जा रहे है,किराय पर नही मिलने पर सेना से मदद ली जायगी,डीजीपी अनिल एम् नवानी ने बतया की पिछले लोकसभा से इस बार फोर्स अधिक मिला है,हलाकि विधानसभा चुनाव में ३५० कपनी छ्त्तिस्ग्र्हा को मिली थी,उसके मुकाबले कम फोर्स मिला है,

Sunday, March 22, 2009

हीर

Thursday, January 22, 2009

छग में महिला बटालियन को मंजूरी

छत्तीसगढ़ में कमांडो बटालियन के बाद महिला बटालियन को मंजूरी दी गई है ,महिला बटालियन के लिय विचार मंथन किया जा रहा है , महिला बटालियन को ऐटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) के साथ भी जोड़ा जा सकता है , अम्लेस्वर महदेओ घाट के कमांडो ट्रेनिग ओर जगल वार काकेर में ट्रेन किया जायेगा ,लगभग ४०० महिला होगी बटालियन में , नक्सल पीड़ित छग में महिला नक्सलियों की सख्या को देखते हुऐ यह निर्णय लिया गया है ,

Monday, January 19, 2009

नक्सलियों के खिलाफ सयुक्त अभियान, चिदम्बरम

केंद्री ग्रह मंत्री पी चिदम्बरम ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोमवार की शाम राजभवन में बैठक ली ,इसमें मुख्यमंत्री डा रमन सिह ग्रह मंत्री ननकीराम कवर डीजीपी विश्व रंजन सहित ग्रह विभाग के अफसर शामिल थे , देश के नक्सल समस्या को ख़तम करने के लिए संयुक्त अभियान चलाया जाएगा ,केंद्री ग्रह मंत्री बनाने के बाद वह पहली बार नकासल परभावित छग आए है ,देश के ११ नक्सल पीड़ित राज्यों में छतीसगढ़ घोर नक्सल राज्य है , इसके १८ जिलो में १२ नक्सल पीड़ित राज्य है , बस्तर में चल रहे सलवा जुड़म आन्दोलन के विषय उनोहने कुछ नहीं बोला ,दूसरी और कांग्रेस ने दंतेवाडा के सिगावाराम मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए सी बी आई जाच की मांग की है ,इस मुठ भेड में १६ आदिवासी की मोत हुई है , पुलिस पहले से ही इस मामले में घिरी हुई है ,

Thursday, January 15, 2009

छग पर सिमी की नजर

देश के बड़े महानगरो में पिछले साल हुए आतंकी धमाके में शामिल इडीयान मुजाहिदीन (आईऍम )इस्लामिक स्टुडेंट मूमेंट (सिमी ) का बदला हुआ नाम निकला , इसके बाद मध्य्पर्देश, उत्तर परदेश ,महाराष्ट, दिल्ली ,आन्ध्र परदेश , में हुए गिरफ्तारी में ऐसे आरोपी पकडे गए इनके तार छत्तीसग के सिमी से जुड़े थे , विभाजन से पहले मध्य्पर्देश सिमी की छग इकाई यहाँ सक्रीय थी , इनके सदस्य आज भी मोजुड़ है, इंन पर खुफिया तंत्र की नजर है ,केंद्र सहित राज्य के गुप्तचर विभाग को इसकी पुरी जानकारी है ,मुख्यमंत्री डा रमन सिह ने ६ जनवरी को केंद्र द्वारा दिल्ली में आयोजितआतंक वाद निरोधक दस्ता गठन बैटक में छग पर सिमी की नजर होने की बात कही थी ,सूत्रों के आनुसार सिमी का नेता सफ़दर नागूरी का छग आ चूका था, इससे यहाँ के सदस्यों की सकिरिता का आनुमान लगाया जा सकता है

Tuesday, January 13, 2009

नक्सलियों के निशाने पर बजरंग दल

पिछले महीने बस्तर में नक्सलियों ने शहीद सप्ताह में भाजपा सहित आर एस एस ,विश्वहिंदू परिषद्,बजरंग दल के खिलाफ एजंडा पेश किया था, इसकी जानकारी पुलिस को भी है, बजरंग दल के राष्ट्रीय सह सयोजक शुभाष जी चव्हान ने कह की हम उरिसा में भी नक्सलियों के निशाने पार है , बजरंग दल आतंकवाद के खिलाफ पहले से ही है , अब नक्सलियों के, बस्तर के दंतेवाडा में हल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बजरंग दल के जिला सयोजक भीमाराम मांडवी जीतकर आय है,

Sunday, January 11, 2009

नक्सली फिर फैला रहे अफवाह डीजीपी

डीजीपी विश्व रंजन ने बताया की बस्तर के बीजापुर दंतेवरा सिगावर नाले के पास पुलिस ओर नक्सलियों के बीच हुए गुरुवार को एन्कौन्टर में मरे गए १५ नक्सली को सही बताया ,उनोहोने कहा की पोलिस को सफलता मिलते ही नक्सली समर्थक अफवाह फैलाते है ,

Saturday, January 10, 2009

छग में आतंकियों से निपटने कमांडो बटालियन

छत्तीसग राजधानी रायपुर में आज १० जनवरी शनिवार को राज्यपाल ने तीसरी बटालियन को कमांडो बटालियन के रूप घोषित किया है , इन्हे १५ मास्टर ट्रेनिग देगे इनके पास एनएसजी,बीएसफ की स्पेशल ट्रेनिग है , केंद्र के आदेश पर यह दस्ता गठित किया गया है , आतंकवाद निरोधक दस्ता (ऐ टीएस )राज्य में काम करेगा , देश में आपना कमांडो बटालियन बनाने वाला पहला राज्य है

Friday, January 9, 2009

देश में आतंक के खिलाफ गोरखपुर का योगी

शिवसेना चीफ बाला साहेब ठाकरे देश में आतेंक के खिलाफ आवाज उठा रहे है, वही गोरखपुर के भाजपा सांसद योगी आदिनाथ भी एकहिन्दू हदयसम्राट के रूप में उभरकर जनता के सामने आ रहे है , गोरखपुर के साथ ही वह पुरे उत्तरप्रदेश में अपनी पहचान बनाने में कामयाब नजर आ रहे है वह दिन दूर नही जब वह पूरे देश में हिन्दू नेते के रूप में पहचने जायगे.आतंकवादियों के सूची में योगी का नाम भी शामिल है,लेकिन सरकार उन्हें फोर्स नही दे रही रही है देश की भगवा सेना उनके साथ है ,