Friday, July 31, 2009

मुख्यमंत्री ने ली पुलिसअफसरों की क्लास


मुख्यमंत्री डा।रमन सिंह व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में अफसरों की मैराथन बैठक ली। हाल के दिनों में नक्सल वारदातों में बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने नाराजगी फटकार लगाई, वहीं अफसरों में व्याप्त गुटबाजी पर जमकर भड़के। मुख्यमंत्री डा.रमन ने दो टूक शब्दों में अफसरों को नक्सल आपरेशन के पुख्ता एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डा.रमन ने मुख्यालय में फेरबदल का भी इशारा किया है।विधानसभा के मानसून सत्र से फुरसत पाने के बाद आज सुबह करीब ११ बजे मुख्यमंत्री व गृहमंत्री छापामार अंदाज में पुलिस मुख्यालय पहुंचे। उनके अचानक पहुंचने पर मुख्यालय में हड़कंप मच गया। जब श्री सिंह वहां पहुंचे तब कुछ गिने-चुने अधिकारी ही वहां मौजूद थे। उनके आगमन की खबर पाते ही अफसरों ने बेल्ट कसी और वे पुलिस मुख्यालय की तरफ दौड़े। कुछ ही देर में ही पीएचक्यू का कांफ्रेंस हाल पुलिस अफसरों से पट गया। मुख्यमंत्री ने पुलिस अफसरों के पहुंचने के बाद ही बैठक शुरू की लेकिन इशारों ही इशारों में अफसरों की चुस्ती-फुर्ती के लिए अपनी नाराजगी भी प्रकट कर दी। लगभग ११ बजकर १० मिनट पर कांफ्रेंस हाल में मुख्यमंत्री डा.रमन, गृहमंत्री श्री कंवर, मुख्य सचिव पी.जॉय उम्मेन, प्रमुख सचिव (सीएम) बैजेंद्र कुमार, गृह सचिव एनके असवाल, विशेष सचिव अमन सिंह, डीजीपी विश्वरंजन, नक्सल आपरेशन एडीजी रामनिवास, एडीजी गिरधारी नायक, आईजी (इंटेलीजेंस) डीएम अवस्थी, आईजी आनंद तिवारी, आरके विज, आईजी मुकेश गुप्ता, डीआईजी नक्सल आपरेशन पवन देव, अरुण देव गौतम, राजकुमार देवांगन सहित अन्य अफसरों की मौजूदगी में बैठक शुरू हुई। मुख्यमंत्री श्री सिंह ने प्रदेश में बढ़ रही नक्सली घटनाओं को लेकर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने साफ शब्दों में पुलिस के एक्शन प्लान को कमजोर बताया। डाक्टर सिंह ने कहा कि नक्सली अपने हरकतों से सरकार को अस्थिर करने का षडय़ंत्र रच रहे हैं। पुलिस को चाहिए कि वह इसका मुंहतोड़ जवाब दे। उन्होंने अद्र्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए विशेष योजना तैयार करने के आदेश दिए। बैठक में मानपुर की घटना के बाद पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर भी उन्होंने डीजीपी विश्वरंजन और एडीजी नक्सल आपरेशन रामनिवास पर नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री ने बरसात के बाद नक्सल आपरेशन के लिए पुख्ता एक्शन प्लान बनाने कहा है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बैठक में मुख्यमंत्री श्री सिंह ने गृहमंत्री श्री कंवर की नाराजगी दूर करते हुए मुख्यालय स्तर पर फेरबदल के भी संकेत दिए हैं। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पूरे बैठक में गृहमंत्री मुख्यमंत्री डा.रमन की हर बात से सहमत नजर आए। उन्होंने कुछ खास तो नहीं कहा पर बैठक में मुख्यमंत्री के तेवर देखकर यह बात स्पष्ट हो गया कि श्री कंवर मुख्यालय की अफसरशाही से नाराज चल रहे हैं। इसे लेकर ही मुख्यमंत्री ने आकस्मिक बैठक लेकर आपसी मतभेद को दूर करने का प्रयास करने के साथ ही मनमानी करने वाले अफसरों को सीधे तौर पर संकेत दिया है कि अनुशासन में रहे।

मिनट टू मिनट कार्यक्रम१०:३० पर पीएचक्यू को मिली सूचना १०:५० मुख्यमंत्री और गृहमंत्री पहुंचे११:०० बजे डीजीपी के चेंबर से बाहर निकले११:१० कांफ्रेंस हाल में बैठक शुरू१:०० पौधरोपण कार्यक्रम रद्द १:३० वन विभाग की नर्सरी लौटा दिए गए पौधे२:०० बैठक के समय में इजाफा२:१० मैराथन बैठक समाप्तपुलिस को बेहतर बनाने बैठक : रमन मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह ने बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पुलिस में बेहतर सुधार के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में प्रदेश में कानून व्यवस्था के साथ ही नक्सल समस्या और पुलिस की समस्याओं को लेकर चर्चा की गई। अफसरों से भी उनकी परेशानियों की जानकारी ली गई। नक्सल समस्या से निपटने पुलिस के वरिष्ठ और अनुभवी अफसरों को योजना तैयार करने कहा गया है। थानों और चौकियों को मजबूत बनाया जाएगा। केंद्रीय बलों को किन क्षेत्रों में नियुक्त किया जाए इस पर भी चर्चा की गई है।

Thursday, July 30, 2009

नक्सली शहीद सप्ताह में पुलिस सतर्क


नक्सल प्रभावित बस्तर में माओवादी द्वारा मनाए जा रहे नक्सली शहीदी सप्ताह का पूरा असर देखा गया है। उद्योग घरानों का विरोध करने के साथ ही नक्सली अब रात्रि में चलने वाली यात्री बसों की तलाशी भी ले रहे हैं। नक्सलियों को शक है कि पुलिस किसी योजना के तहत उन तक पहुंच सकती है। यात्री बसों और निजी फोर व्हीलर वाहनों के लिए फरमान जारी करते हुए गाड़ी के भीतर की लाइट जलाए रखने का फरमान भी नक्सलियों ने जारी किया है। प्रदेश से लगे नक्सल प्रभावित उड़ीसा ,महाराष्ट्र के साथ साथ बस्तर संभाग में नक्सली शहीदी सप्ताह का असर छाया हुआ है। वर्दीधारी नक्सली किसी भी मोड़ और दूरस्थ इलाके में जंगल से निकल कर सामने आ जाते हैं। यात्री बस और आंध्रप्रदेश की ओर से आने वाले मालवाहक वाहनों को रोककर तलाशी ली जा रही है। यात्री बसों में सवार यात्रियों के जरिए वे अपना संदेश भी प्रचारित कर रहे हैं। पुलिस ने भी नक्सली पर्चे बरामद किया है। पर्चों में स्थानीय गोढ़ी और हल्बी भाषा का प्रयोग भी किया गया है। नक्सली अपनी शहीदी सप्ताह में पूरी तरह सर्तकता बरत रहे है। खुफिया तंत्र के मुताबिक प्रदेश में विधानसभा सत्र चलने और ३ अगस्त को नक्सली सप्ताह के समापन पर नक्सली कोई बड़ा धमाका कर सकते हैं। बाक्सनए क्षेत्रों में पुलिस एलर्ट शहीदी सप्ताह में नक्सल प्रभाव वाले नए इलाके रायपुर जिले के मैनपुर गरियाबंद,धमतरी जिले के नगरी, सिहावा,दुर्ग जिले के दल्लीराजहरा,कुम्हारी,चरौदा (कारतूस बरामदगी के इलाके ) राजनांदगांव के आउटर के जंगल में पुलिस सर्तकता बरत रही है।

Tuesday, July 28, 2009

सेना से नक्सलियों को बचाने मानवाधिकारों के ठेकेदार आगे आए


केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने छत्तीसगढ़, ङाारखंड, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश व महाराष्ट्र में काम कर रहे नक्सली संगठनों को निशाना बनाते हुए स्पष्ट शब्दों में सैन्य कार्रवाई करने का संकेत दिया है। सैन्य कार्रवाई की कल्पना से ही नक्सली समर्थक संगठनों में हड़कंप मचा हुआ है। डा.विनायक सेन को जेल से रिहा कराने के लिए बनी केंद्रीय समिति ने सैन्य कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन छेडऩे की घोषणा करते हुए नक्सलियों से शांतिवार्ता करने की मांग रखी है।देश के ११ राज्यों में नक्सलियों के पांव पसारने और पांच राज्यों में समानांतर सरकार चलाने के प्रयास को विफल करने के लिए केंद्र ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। खासतौर से लालगढ़ की घटना के बाद सरकार ने नक्सलियों को आतंकवादियों की Ÿोणी में रखा है। अब तक केंद्र इसे राज्य की समस्या मानती आई थी, लेकिन अब छत्तीसगढ़, उड़ीसा, ङाारखंड, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश में एकाधिकार रखने वाले नक्सलियों के खिलाफ कें्र ने सैन्य कार्रवाई की मानसिकता बना ली है। दूसरी ओर सरकार के इस कड़े कदम और कोबरा बटालियन की स्थापना को देखते हुए मानवाधिकार संगठनों ने आगे चलकर बड़े पैमाने पर नरसंहार होने की संभावना व्यक्त की है। सूत्रों के मुताबिक डा.विनायक सेन को रिहा कराने देश के सभी राज्यों में बनाई गई केंद्रीय समिति ने दिल्ली में बैठक का आयोजन किया है। इसमें छत्तीसगढ़, ङाारखंड व उड़ीसा के पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया है। जेल से रिहा होने के बाद पीयूसीएल के महासचिव डा.विनायक सेन भी इस बैठक में पहली बार शामिल हुए हैं। बैठक में मानवाधिकार संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा है कि सरकार द्वारा नक्सलियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से लाखों की संख्या में निर्दोष आदिवासियों की जान को खतरा है। सरकार नक्सलवाद को खत्म करने के लिए शांतिवार्ता आयोजित करे। नक्सल प्रभावित राज्यों में अद्र्धसैनिक बलों की कार्रवाई से पहले ही लाखों की संख्या में आदिवासियों को क्षति पहुंचाई जा चुकी है।बाक्सदिल्ली में भी सक्रिय अब तक दिल्ली में आईएसआई के एंजेट पकड़े जाते रहे हैं, वहीं पिछले महीने एक महिला नक्सली और नक्सली समर्थक पकड़े गए हैं। इनकी दिल्ली में उपस्थिति से हंगामा मचा हुआ है। दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार दर्जनों की संख्या में नक्सली समर्थक यहां मौजूद हैं, लेकिन इनके खिलाफ दिल्ली पुलिस के पास साक्ष्य नहीं है।

Saturday, July 25, 2009

उच्चान्यांयालय ने डीजीपी को जारी की नोटिस


हाईकोर्ट बिलासपुर ने नक्सल प्रभावित इलाके में सात साल सेवा देने के बाद फिर से नक्सल प्रभावित मानपुर भेज जाने के स्थांतरण आदेश के विरुद्ध एडिशनल एसपी एम आर आहिरे की याचिका पर गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय को नोटिस जारी किया है। मिली जानकारी के अनुसार १२ जुलाई को मानपुर इलाके में नक्सलियों ने राजनांदगांव एसपी विनोद कुमार चौबे पर घातक हमला कर दिया था। इस हमले में एसपी सहित २८ जवान शहीद हो गए थे। घटना के तत्काल बाद राजधानी के एडिशनल एसपी (यातायात)एम आर आहिरे को मानपुर एडिशनल एसपी के रुप में स्थातंरण कर दिया गया। श्री आहिरे हाल ही में नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में अपनी सेवा देकर लौटे थे। लगभग सात वर्षो तक वह बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में रहे थे। सूत्रों के मुताबिक श्री आहिरे ने हाईकोर्ट बिलासपुर में तबादला रुकवाने स्टे लगाया था। हाईकोर्ट ने गृह विभाग सहित डीजीपी विश्वरंजन को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट में स्थांतरण के विरुद्ध याचिका दायर करने वाले पहले पुलिस अधिकारी नहीं है। इससे पहले भी डीएसपी,इंस्पेक्टर,सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों ने तबादला के विरुद्ध स्टे लाया है।

छत्तीसगढ़ पुलिस की तबादला नीति पर उठी अंगुली

चुनाव के मद्देेनजर साल में दो बार राज्य पुलिस में हुए तबादलों पर भी ऊंगली उठनी शुरु हो गईं है। इन तबादलों में निरीक्षक, उपनिरीक्षक साहित सिपाही स्तर के कर्मचारियों को एक नक्सल प्रभावित जिले से दूसरे नक्सल प्रभावित जिले में भेज दिया गया था। जबकि मैदानी जिले में अर्से से पदस्थ अधिकारी,कर्मचारी सुरक्षित जिलों में ही भेजे गए थे। कृपापात्र कर्मचारी अधिकारी दस वर्ष की नौकरी के बावजूद अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नहीं भेजे गए हैं। जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस जवान मायूस हैं। उनका मनोबल लगतार गिर रहा है। जो पुलिस की तबादला नीति को कटघरे में खड़ा करता है। गौरतलब है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लगने से पहले थोक में इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, हवलदार, सिपाही आदि के तबादले किए गए थे। जानकारी के मुताबिक इन तबादलों में नक्सल प्रभावित इलाके के अधिकारी कर्मचारियों को गैर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नहीं भेजा गया, बल्कि नेताओं द्वारा पसंद के पुलिस अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में पदस्थ कराया गया। लोकसभा चुनाव के समय भी आचार संहिता लगने से पहले हुए तबादलों में भी यह खेल जारी रहा। इसमें स्पष्ट नजर आता है कि मैदानी इलाके में पदस्थ पुलिस अधिकारी दूसरे मैदानी जिलों में स्थांतरित किए गए। इस दौरान सूची में भी गड़बड़ी की बात भी सामने आई जब नक्सल प्रभावित जिले से वापस बुलाकर मैदानी जिले में भेजे गए अधिकारी फिर से नक्सली जिले में स्थांतरित कर दिये गये। इनमे से अधिकांश ने प्रशासन शाखा में गुजरिश आवेदन लगाया और कुछ ने कोर्ट जाकर स्टे लाने का जुगाड़ किया। बहारहाल इस भेदभाव पूर्ण नीति के शिकार होने वालों की संख्या ज्यादा है। हाल ही में पूर्व गृह मंत्री नंद कुमार पटेल ने आरोप लगाया है कि पुलिस महकमें में दरबारी पुलिस मैदानी क्षेत्रों में वर्षो से जमे हुए है। हालांकि अविभाजित छत्तीसगढ़ में भी वह गृह मंत्री रहते हुए छत्तीसगढ़ के कई अधिकारियों को नक्सल प्रभावित बस्तर और सरगुजा संभाग में नहीं भेज पाए थे।
मैदानी जिले
रायपुर से दुर्ग,बिलासपुर से कोरबा,रायगढ़ से महासमुंद,धमतरी से रायपुर,जांजगीर चांपा से कर्वधा।
नक्सल प्राभावित जिले
सूरजपुर,नारायणपुर से बलरामपुर,जगदलपुर से कांकेर, सरगुजा से बीजापुर दंतेवाड़ा से बस्तर राजनंदगांव से कांकेर आईबी की नजर नक्सल प्रभावित इलाकों में सजा बतौर भेजे जाने वाले अधिकारियों की बदली मानसिकता पर अब केन्द्रीय खुफिया तंत्र ने भी नजर रखना शुरु कर दिया है। इनमें वे अधिकारी शामिल हैं जिन्होंने नौकरी छोडने यह कोर्ट से स्टे लाने का प्रयास शुरु कर दिया है। अब यह भी माना जा रहा है कि हताश हो चुके अधिकारी कर्मचारी की फौज नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात कर नक्सल समस्या को बढ़ाया जा रहा है। इसके शिकार सीआरपीएफ के अधिकारी और जवान भी हो रहे है।

Friday, July 17, 2009

लोहा खदान की सुरक्षा में जुटा था मुख्यालय


मानपुर इलाके में स्थित पल्लामाड़ लोहा खदान एक निजी कंपनी को सौपे जाने के बाद से नक्सलियों ने इसे बंद करवाने का फरमान जारी किया था। वहीं उच्चस्तरीय आदेश के तहत पुलिस मुख्यालय लोहा खदान की सुरक्षा में जुटा हुआ था। चौकी खुलवाकर और कैंप लगाकर किसी भी तरह नक्सलियों से निपटने के लिए तैयार था। लेकिन राजनंदगांव के उच्चाधिकारी बल की कमी को देखते हुए यहां कैंप लगाने और चौकी खोलने के पक्ष में शुरु से नहीं थे। एसपी विनोद कुमार चौबे की शहादत के बाद विभाग में चल रहे अफसरशाही का मामला एक के बाद एक कर उजागर होता जा रहा है। पुलिस मुख्यालय में बैठे आला अफसरों को मालूम था कि पल्लामाड़ में लगाए गए लोहा खदान का नक्सली पोरा जोर विरोध कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा खदान के प्रदुषण से वहां के खेतखलिहान को बरबाद किए जाने आरोप भी लगाया जाता रहा। इस विरोध को दबाने के लिए वहां पुलिस की चौकी और कैंप लगाए जाने का मुख्यालय ने आदेश जारी किया था। मुख्यालय के एसी कमरो में रिर्मोट दबाकर कागजों पर नक्सली हमले का एक्शन प्लान बनाने वाले अफसरों की पोल धमतरी और राजनंदगांव की घटना के बाद एक एक कर खोल रही है। हालांकि धमतरी की घटना के समय डीजीपी अनिल एम नवानी पर टिकारा फोड़ा गया था। इस घटना के बाद डीजीपी विश्वरंजन को छुट्टी से वापस बुलाकर फिर से ज्वाइनिंग दिलाई गई थी। लेकिन दो महीने बाद भी कागजों पर योजना तैयार करने के अलावा कोई विशेष कार्य नहीं हो पाया। राजनंदगांव एसपी विनोद कुमार चौबे मदनगढ़ चौकी खोले जाने के पक्ष में नहीं थे। उन्हें अर्ध सैनिक बल की संख्या को देखते हुए चौकी खोलने पर एतराज किया था। इस प्रभावित क्षेत्र खडग़ांव चौकी प्रभारी ने बल की कमी को देखते हुए चौकी जाना ही छोड़ दिया था। जिसकी विभागीय जांच भी की जा रही है। बहारहाल नक्सली मानपुर डिविजन में लोकसभा चुनाव के समय से ही पर्चा बांटकर गांव गांव में सभा ले रहे थे। पुलिस के उच्चाधिकारी भी इस बात से इंकार नहीं कर सकते है। इस घटना के बाद भी भाकपा मानपुर ने लोहा खदान का विरोध जारी रखा है। बाक्स लिट्टे की ट्रेनिंग थी नक्सलियों के पास राज्य पुलिस के उच्चाधिकारी भले ही घटना स्थल पर अब तक नहीं पहुंचे है। लेकिन केन्द्रीय खुफिया तंत्र ने इस पूरी घटना के तौर तरीके पर लिट्टे की ट्रेनिंग का हवाला दिया है। एक लंबे समय से यह अनुमान लगाया जाता रहा है कि ८० के दशक में नक्सली कमांडरों ने लिट्टे से ट्रेनिंग प्राप्त की थी। हालांकि इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है। लेकिन नक्सलियों की मिलिट्री कमीशन के पास लिट्टे की समकक्ष ट्रेनिंग होने की पुष्टि होती रही है। भले गैर जानकार अफसर बार बार इस हमले में गुरिल्ला वार का हवाला दे रहे है। लेकिन दोनो ओर से घेरा बंदी कर की गई गोलीबारी लिट्टे की प्रसिद्ध चीता युद्ध की पहचान हैं। इसकी ट्रेनिंग लिट्टे के लड़ाके (तमिल चीते) के पास थी। आईजी गुप्ता की पृष्ठभूमि की जांच होपीसीसी अध्यक्ष धनें्र साहू ने मानपूर से लौटकर पूरे मामले में दुर्ग आई जी मुकेश गुप्ता की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच की है।

Wednesday, July 15, 2009

डीजीपी पढ़ रहे कविताये नक्सली खेल रहे खून की होली

नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक समेत ३० जवानों की जान लेकर एक बार फिर राज्य में अपनी मजबूत स्थिति का एहसास करा दिया है। नक्सलियों ने पिछले साढ़े चार सालों में लगभग १३०० लोगों के जीवन से खूनी खेल खेला है। जसमें पुलिसकर्मीं, विशेष पुलिस अधिकारी और आम नागरिक शामिल हैं।करीब तीन दशक पहले शुरू हुआ नक्सलियों का तांडव अब नासूर बन गया है। जैसे-जैसे समय गुजरता गया नक्सली कमजोर होने की बजाय मजबूत होते गये हैं। प्रदेश सरकार मुखिया डॉ. रमन सिंह के नक्सलियों के विरुद्ध बेहद सख्त होने के बावजूद अब तक विशेष सफलता नहीं मिली है जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यकुशलता पर प्रश्रचिन्ह लगने लगा है। कुछ अधिकारियों को छोड़ जिनके नेतृत्व में यह लड़ाई लड़ी जा रही है उनमें इच्छाशक्ति की कमी दिखाई देती है। पुलिस मुखिया के कार्यकलापों पर नजर दौड़ाएं तो वे अपने साथ दो दर्जन से अधिक पुलिस कर्मचारियों की फौज के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और साहित्यिक सम्मेलनों में ही नजर आते हैं। जबकि उन्हें नक्सलवाद के खिलाफ जंग लडऩे वाला मजबूत अधिकारी मानकर इस पद पर बिठाया गया था। यदि आंकड़ो पर गौर करें तो उनके पुलिस निदेशक बनने के बाद नक्सली हमलों में तेजी आई है। विगत साढ़े चार वर्षो में नक्सली लड़ाई की भेंट चढ़ी लगभग १३०० जानों में से ज्यादतर विगत दो वर्षाे में गई हैं। कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी डीजीपी के विरुद्ध जा रहे हैं। इनमें से एक विधानसभा चुनाव के समय तत्कालीन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आलोक शुक्ला के साथ दंतेवाड़ा जिले में चुनाव सम्पन्न कराने के संबंध में हुई चर्चा में डीजीपी विश्वरंजन का जबाव भी है। जिसमें उन्होंने पहाडिय़ों पर तीन सौ नक्सलियों की मौजूदगी की बात तो स्वीकारी थी लेकिन उनके विरुद्ध कोई अभियान नहीं चलाया था। पुलिस महानिदेशक की कार्यप्रणाली से स्वयं गृहमंत्री भी असंतुष्ट हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मौजूदा पुलिस नेतृत्व में नक्सलियों के विरुद्ध प्रभावी लड़ाई लड़े जाने में आशंका जताई है। बस्तर सांसद बलीराम कश्यप ने तो डीजीपी को असफल करार कर दिया है। उन्होंने राजनांदगांव की घटना के बाद असंतोष जाहिर किया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता रविं्र चौबे भी सार्वजनिक रूप से पुलिस महानिदेशक की योग्यता पर प्रश्र चिन्ह लगाते हुए कानून व्यवस्था की चिंता करने की बजाय उनके अन्य कार्यों में व्यस्त रहने पर रोष प्रकट कर चुके हैं। चार वर्षों में गई तेरह सौ जानेंवर्ष २००५ से लेकर अब तक १३०० से अधिक जाने गई हैं। इनमें ३६० पुलिसकर्मी, १४३ विशेष पुलिस अधिकारी व ७९३ आम नागरिक शामिल हैं। इस दौरान पुलिस ने २८१ नक्सलियों को मार गिराया व ६३७ को गिरफ्तार किया है। नक्सलियों ने इसी वर्ष के मात्र छह माह में सौ से ज्यादा पुलिसकर्मियों और विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) की जान ली है। अब तक विभिन्न नक्सली घटनाओं में ८६ पुलिसकमियों और १५ एसपीओ जान गई है। १० अप्रैल को दंतेवाड़ा जिले में सीआरपीएफ के गश्ती दल पर नक्सली हमला ,दस पुलिस कर्मी शहीद ,सात अन्य घायल। लोकसभा मतदान के दौरान राजनांदगांव जिले में बारूदी सुरंग में विस्फोट कर मतदान दल के पांच अधिकारियों की हत्या, व केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दो जवानों को गोली मार दी। छह मई को दंतेवाड़ा जिले में हमला किया और बारूदी सुरंग में विस्फोट कर ट्रेक्टर को उड़ाया, दो सीआरपीएफ के जवान और पांच एसपीओ समेत ११ लोग शहीद, धमतरी जिले में ११ मई को पुलिस वाहन को उड़ाया, १२ पुलिसकर्मी शहीद, सात अन्य घायल, २० जून को दंतेवाड़ा जिले में बारूदी सुरंग में विस्फोट कर ट्रक को उड़ाया, सीआरपीएफ के ११ जवान शहीद, ११ अन्य घायल। इन आंकड़ों में मारे गए गोपनीय सैनिक या सरकारी कर्मचारी शामिल नहीं है।

Monday, July 6, 2009

नक्सल आपरेशन,हाईटेक होगे जवान.


रायपुर नक्सल आपरेशन में लगे जवानों को हाइटेक करने की योजना केन्द्रीय गृह विभाग के नक्सल सेल ने बनाई है। जिसमें नक्सल इलाके में तैनात राज्य पुलिस के जवान भी शामिल रहेगें। इसके लिए बुलेट प्रूफ जैकेट और सेटेलाइट सेल फोन देने की तैयारी की जा रही है। नक्सल आपरेशन में लगे जवानों को हाइटेक करने की योजना पर अमल बस्तर संभाग में तैनात फोर्स से शुरु की जाएगी। ङाारखंड,उड़ीसा,महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित इलाकों में फोर्स को अत्यधिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। वहीं बस्तर संभाग में घने जंगलो और ऊंचे पहाडिय़ों के बीच विकराल समस्या से गुजरना पड़ता है। यहां सर्चिग के दौरान फोर्स का संर्पक तंत्र टूट जाता है। इसका भरपूर फायदा नक्सली उठाते है। अन्य राज्यों के मुकाबले नक्सली सबसे ज्यादा हमले बस्तर में करते है। नक्सलियों से मुठभेड़ के समय सही पोजीशन (छुपने का स्थान) नहीं मिल पाता है। इस कारण जवान गोलीबारी के शिकार हो जाते हंै। नक्सल आपरेशन विशेषज्ञों ने माना कि विस्फोट के साथ ही नक्सली चारो तरफ से गोलीबारी शुरु कर देते हैं। इस दौरान फोर्स को संभालने का मौका नहीं मिलता है। ऐसी घटनाओं को देखते हुए आपरेशन में जाने वाले जवानों को बुसे पहले फोर्स को जो जैकेट मिलता था। उसका वजन ज्यादा रहता था। इससे जवान सर्चिग के दौरान थक जाते थे। राज्य पुलिस न्लेट प्रूफ जैकेट देने की योजना बनाई गई है। इसो भी अपने स्तर पर खरीदी के लिए प्रयास शुरु कर दी है। बुलेट प्रूफ का उपयोग एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) के जवान भी करेगें। अधिकारिक सूत्रो के मुताबिक लगातार केन्द्रीय गृह विभाग के नक्सल सेल द्वारा नक्सल प्रभावित राज्यों के गृह मंत्री व पुलिस प्रमुखों से बैठक होते रहती है। जिसमें ऐसी योजना तैयार की गई है। बाक्सहाइटेक कर ज्वाइंट आपरेशन ,डीजीपी डीजीपी विश्वरंजन ने बताया कि बस्तर में तैनात अर्धसैनिक बल और जिला बल अपने अपने थाना क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाते हंै। केन्द्रीय गृह विभाग ने फोर्स को हाइटेक करने की योजना पर काम शुरु कर दिया है।बाक्सफोर्स के लिए वरदान बस्तर में तैनात फोर्स को नक्सली अक्सर घने जंगल में ही घेराबंदी कर मात दे पाते हैं। लेकिन सेटेलाइट फोन और हल्के वजन वाली बुलेट प्रूफ जैकेट जवानों के लिए वरदान साबित होगी। सेटेलाइट के जरिए वह दिशा ज्ञान के साथ साथ अपने दूसरे साथियों को भी मदद के लिए बुला पाएगें।

Friday, July 3, 2009

बारिश थमी तो नक्सली करेंगे अटेक


प्रदेश में इस बार बारिश कम होने की संभावना है। इससे यह अनुमान है कि नक्सली हमलों में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। नक्सल आपरेशन से जुड़ेअधिकारियों का मानना है कि बरसात के तीन महीने नक्सली चुप बैठते हैं। इसके पीछे बस्तर के नदी नालो में उफान और जंगलो में पानी भर जाना है। यहां इस मौसम में मलेरिया और डायरिया जैसे संक्रामक बीमारी फैल जाती है। लेकिन इस बार बरसात नहीं होने पर नक्सलियों को हमला करने में आसानी होगी। पुलिस मुख्यालय में इसे लेकर एक गोपनीय बैठक भी हुई है। प्रदेश में इस बार मानसून विलंब से आने के कारण नक्सली गतिविधियां जून के पूरे महीने जारी रही। बीते वर्षो में बारिश के साथ ही नक्सली गतिविधियां मानसून आने के साथ ही थम जाती थी। बस्तर के अधिकांश इलाकों में पानी भर जाता है। इस बार बारिश कम होने पर नक्सली हमला तेज कर सकते हैं,उन्हें बारुदी सुरंग बिछाने और नदी नाले के पास कैंप करने में आसानी होगी। गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में नक्सल आपरेशन से जुड़े अफसरों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें खासतौर से बस्तर आईजी टीजे लांगकुमेर उपस्थित थे। हालांकि मुख्यालय के अफसरो ने इसे रुटीन बैठक कहा है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में मौसम वैज्ञानिकों की भी मदद ली गई है। जिसमे इस महीने मानसून आने से लेकर तेज वर्षा वाले दिनों का आंकलन कर हिसाब लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक एक सप्ताह की तेज बारिश में ही बस्तर का जंगल लबालब भर जाता है। वन ग्रामों में इसके बाद वाइरल फीवर ,डायरिया और मलेरिया जैसे बीमारी फैल जाती हैं। मच्छरों के प्रकोप से वहां तैनात फोर्स भी हलाकान रहता है। नक्सली भी इस कुदरती मार से अपने को बचने के लिए मैदानी क्षेत्रों की शरण लेते हैं। बाक्स नदी नाले में उफान के साथ सर्चिग बंद अधिकारी सीधे तौर पर नहीं स्वीकारते लेकिन बारिश के महीने में नदी नाले में उफान आते ही सर्चिग बंद रहती है। वहीं नक्सली भी इस मौसम में बारुदी सुंरग बिछा पाने में असहाय रहते है। जिससे बड़े विस्फोट के मामले भी नहीं होते है। प्रदेश में २००१ के बाद पहली बार बारिश कम हुई है। बाक्समानसून सत्र हो सकती है बड़ी घटना नक्सल मामलों के विशेषज्ञों का अनुमान है कि नक्सली अपनी ताकत दिखाने किसी भी बड़े अवसर पर धमाका करते हैं। इससे अगामी सप्ताह तक किसी बड़े नक्सली घटना की संभावना है। इसे देखते हुए फोर्स को सचेत रहने कहा गया है।बाक्सअब दिल्ली भी अर्लट केन्द्र सरकार द्वारा आंध्रप्रदेश,उड़ीसा,छत्तीसगढ़ ,ङाारखंड,महाराष्ट्र में नक्सलियों से सीधे युद्ध छेडऩे की घोषणा के बाद खुफिया विभाग ने दिल्ली में भी सर्तकता बरतने की सलाह दी है। दो सप्ताह पूर्व एक महिला नक्सली दिल्ली में नक्सली पर्चे के साथ गिरफ्तार की गई थी।