खाओ भारत का ,गाओ पाकिस्तान का
वादेमातरम। 13 फरवरी की शाम पुणे में हुए बम धमाको से केन्द्र सरकार और स्वंय को बुद्धिजीवी कहने और खेल भावना वाले शहरुख खान समर्थक जान ले कि पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश के साथ हमदर्दी दिखाने का क्या खम्यिाजा भुगतना पड़ता है। भारत तभी तक धर्मनिरपेक्ष है जब तक यहां हिन्दू बहुसंख्यक है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अपने गीता सार में लिखा था कि दुष्ट व्यक्ति के साथ दुष्टता से ही निपटा जा सकता है। सज्जनता वहां काम नहीं आती। लेकिन शाहरुख खान और उन जैसे खेल भावना वालो को कौन समझाए। देश को आतंकवादी ताकतो के हाथ में सौपने वाले बुद्धिजीवियों से अब डर लगने लगा है। मराठी हदय सम्राट शिव सेना सुप्रीमो बाला सहाब ठाकरे का बयान जैसा भी रहा हो लेकिन शाहरुख खान का बयान भी तरीफ के काबिल नहीं है। खाता भारत की है गाता पाकिस्तान की है। खैर शाहरुख की जिद देश से बड़ी नहीं है। पाकिस्तान के खिलाफ भारतीयो को भी नफरत दिखानी होगी। नहीं तो सज्जनता इस्लामिक आतंकवाद के सामने टिक नहीं पाएगी। बुद्धि जीवियों और खेल भावना वाले महापुरुषो की बात मानकर देश चले तो पाकिस्तान देश में आतंकवादी घटनाओ को श्रेय देता रहे और हम सिर्फ हिंद...