बारिश थमी तो नक्सली करेंगे अटेक
प्रदेश में इस बार बारिश कम होने की संभावना है। इससे यह अनुमान है कि नक्सली हमलों में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। नक्सल आपरेशन से जुड़ेअधिकारियों का मानना है कि बरसात के तीन महीने नक्सली चुप बैठते हैं। इसके पीछे बस्तर के नदी नालो में उफान और जंगलो में पानी भर जाना है। यहां इस मौसम में मलेरिया और डायरिया जैसे संक्रामक बीमारी फैल जाती है। लेकिन इस बार बरसात नहीं होने पर नक्सलियों को हमला करने में आसानी होगी। पुलिस मुख्यालय में इसे लेकर एक गोपनीय बैठक भी हुई है। प्रदेश में इस बार मानसून विलंब से आने के कारण नक्सली गतिविधियां जून के पूरे महीने जारी रही। बीते वर्षो में बारिश के साथ ही नक्सली गतिविधियां मानसून आने के साथ ही थम जाती थी। बस्तर के अधिकांश इलाकों में पानी भर जाता है। इस बार बारिश कम होने पर नक्सली हमला तेज कर सकते हैं,उन्हें बारुदी सुरंग बिछाने और नदी नाले के पास कैंप करने में आसानी होगी। गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में नक्सल आपरेशन से जुड़े अफसरों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें खासतौर से बस्तर आईजी टीजे लांगकुमेर उपस्थित थे। हालांकि मुख्यालय के अफसरो ने इसे रुटीन बैठक कहा है। सूत्रों क...