Tuesday, August 16, 2011

आजादी के 64 साल बाद चली गांधीवादी आंधी ,,,,,,,, आजादी के 64 साल बाद चली गांधीवादी आंधी


आजादी के 64 साल बाद चली गांधीवादी आंधी

आजादी के 64 साल बाद चली गांधीवादी आंधी


आजादी के 64 साल बाद एक बार फिर गांधीवादी आंधी अन्ना के रूप में चली है। केन्द्र सरकार ने अपने दमन नीति के तहत अन्ना के खिलाफ भी बयानबाजी और घपले के आरोपो का पिटारा खोल दिया है। लेकिन जनता सरकारी लोकपाल बिल के खिलाफ अन्ना के समर्थन में खड़े हो गई है। देश के सभी राज्यों में आम जनता और समाजिक संगठनों को अन्ना के समर्थन में सड़क पर उतरते देखा जा सकता है। रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के साथ सरकारी हंथकंड़े और पुलिसिया आतंक को देखने के बाद भी वहीं जनता एक बार फिर सरकार के आतंक को ठेगा दिखाते हुए आजादी की दूसरी लड़ाई में शामिल है। हम कुछ देर के लिए मान भी ले कि अन्ना हजारे पर सरकार के द्वारा लगाए जा रहे आरोप सही भी है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं की देश में सरकारी लोकपाल बिल का विरोध भी न हो। अन्ना हजारे के जीवन शैली को देखते हुए उन पर आरोप लगाना भी न्याया संगत नहीं है। अगर केन्द्र सरकार को लगता है कि अन्ना ईमानदार नहीं है तो एकाद ईमानदार व्यकि्त का नाम बताए जिनके नेतृत्व में जनता सरकारी लोकपाल बिल और कालेधन को भारत में वापस लाने का आंदोलन चला सके। सरकार पर भरोसा कर देश की जनता चुपचाप हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकती है। सही मायने में किसी भी सरकार नाम की चीज पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। लेकिन अन्ना हजारे जैसे निस्वार्थ देश हित में आंदोलन करने वालो के पीछे आंख बंद करके भी चला जा सकता है। समय की मांग है कि देश में भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए। छत्तीसगढ़ प्रदेश में अन्ना हजारे के आंदोलन को राजधानी रायपुर सहित पड़ोसी जिले के साथ ही नक्सल प्रभावित बस्तर में व्यापक समर्थन मिल रहा है। नक्सल प्रभावित देश के सात राज्यों में छत्तीसगढ़,झारखंड,उड़ीसा,बिहार,महाराष्ट्र,आंध्रप्रदेश मध्यप्रदेश में नक्सलवाद बढ़ने के पीछे भ्रष्टाचार और भ्रष्ट व्यवस्था ही एक बहुत बड़ा कारण है। जिसे झुठलाया नहीं जा सकता है। आज अगर नक्सली भी अपने रास्ते से भटके हैं और लेवी वसूलकर अपने करोड़ो के कारोबार को संचालित कर रहे हैं तो इसी भ्रष्ट व्यवस्था के चलते ही उन्हें ठेकेदारो और उद्योगपतियों से लेवी वसूलकर आदिवासियों का हक मारने का मौका मिल रहा है। बहरहाल भ्रष्टाचार से पीडित देश की जनता इसके खिलाफ जंग छेड़ चुकी है। गांधी वादी तौर तरीको से निपटने के लिए सरकार ने भी अपना फंडा तैयार कर लिया है। एक कांग्रेस शासित राज्य के पुलिस अधिकानी ने बताया कि सड़क पर उतरने वाले जनता पर चक्काजाम का मामला दर्ज होते ही गांधीगिरी निकल जाएगी। वहीं एक अफसर ने कहा बिजली गुलकरके एक साथ जनता कर्फयू लगाने वाले लोगो के बारे में भी खुफिया तंत्र पता लगा रहा है। अगर बिजली गुल करके अंधेरा किया और कोई घटना घटी चोरी ,लूट हत्या तो उस आंदोलनकारी की खैर नहीं है। कुल मिलाकर सरकारी तंत्र ने गांधीवादी तौर तरीको को कुचलने की तैयारी कर ली है।

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