Thursday, December 17, 2009

सलवा जूड़ूम के बाद नक्सली हिंसमें बढ़ोत्तरी हुई


वनवासी चेतना आश्रम के संस्थापक ने अपने ऊपर नक्सली समर्थक होने के लग रहे आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वे बस्तर में शांति चाहते है, लेकिन पुलिस बल ,सलवा जुड़ूम,और नक्सली वहां हिंसा चाहते है। इसलिए शांतिवार्ता के लिए चलाए जा रहे पदयात्रा का विरोध किया जा रहा है।
वनवासी चेतना आश्रम के हिमांशु कुमार, पीयूसीएल के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सायल ,जनआंदोलन के राष्ट्रीय समंव्यक डॉ संदीप पांडे ने एक संयुक्त पत्रकारवार्ता में कहा कि बस्तर में जब से सलवा जूड़ूम आंदोलन शुरु हुआ है नक्सली हिंसा में तेजी आई है। जिसमें आम नागरिक ,पुलिस और नक्सली हजारों की संख्या में मारे गए है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आदिवासियों को जंगल से खदेड़ने और माइनिंग उद्योगों को वहां स्थापित करने के लिए सरकार वहां फोर्स तैनात कर रही है। इससे औद्योगिक घरानों और राज्य के कुछ खास लोगों को जरुर लाभ होगा, लेकिन आदिवासी को इससे कोई लाभ नहीं होगा। हम सभी प्रकार की हिंसा के खिलाफ है। हिमांशु कुमार ने कहा कि उनके खिलाफ अगर कोई अपराधिक मामले हैं तो उन्हें पुलिस गिरफ्तार क्यों नहीं करती है। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सलवा जूड़ूम कैंप में रह रहे ग्रामीणों को पुर्नावास करवाना चाहते है। कैंप की जिंदगी से तंग आ चुके ग्रामीण अपने गांव जाना चाहते है। राज्य के गृह सचिव ने बस्तर के सभी जिलाधीश और एसपी को आदेश दिया है कि वह ग्रामीणों को गांव में बसाए। हम इस आदेश का पालन करवाना चाहते है। इस कारण पदयात्रा निकाली जा रही थी। लेकिन इसमें शामिल होने वाले लोगों को पुलिस द्वारा रोका गया। यह संवैधनिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

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