Monday, February 15, 2010

खाओ भारत का ,गाओ पाकिस्तान का


वादेमातरम। 13 फरवरी की शाम पुणे में हुए बम धमाको से केन्द्र सरकार और स्वंय को बुद्धिजीवी कहने और खेल भावना वाले शहरुख खान समर्थक जान ले कि पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश के साथ हमदर्दी दिखाने का क्या खम्यिाजा भुगतना पड़ता है। भारत तभी तक धर्मनिरपेक्ष है जब तक यहां हिन्दू बहुसंख्यक है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अपने गीता सार में लिखा था कि दुष्ट व्यक्ति के साथ दुष्टता से ही निपटा जा सकता है। सज्जनता वहां काम नहीं आती। लेकिन शाहरुख खान और उन जैसे खेल भावना वालो को कौन समझाए। देश को आतंकवादी ताकतो के हाथ में सौपने वाले बुद्धिजीवियों से अब डर लगने लगा है। मराठी हदय सम्राट शिव सेना सुप्रीमो बाला सहाब ठाकरे का बयान जैसा भी रहा हो लेकिन शाहरुख खान का बयान भी तरीफ के काबिल नहीं है। खाता भारत की है गाता पाकिस्तान की है। खैर शाहरुख की जिद देश से बड़ी नहीं है। पाकिस्तान के खिलाफ भारतीयो को भी नफरत दिखानी होगी। नहीं तो सज्जनता इस्लामिक आतंकवाद के सामने टिक नहीं पाएगी। बुद्धि जीवियों और खेल भावना वाले महापुरुषो की बात मानकर देश चले तो पाकिस्तान देश में आतंकवादी घटनाओ को श्रेय देता रहे और हम सिर्फ हिंदु मुस्लिम सिख ईसाई आपस में है भाई भाई कहकर लोकतंत्र की दुहाई देकर होटल ताज के हमले को एक बार फिर आमंत्रण दे दे। क्योकी इस देश को शाहरुख खान और उसके चाहने वाले दर्शक चलते है। इनके साहस की जितनी तरीफ की जाए कम है पुलिस की कड़ी सुरक्षा में माई नेम इज खान देखने जाते है। इन्हें टॉकीज में तोड़फोड़ होने का डर नहीं है। मुठ्ठीभर राष्ट्रवादी देश के बहुसंख्यक बुद्धिजीवियों का कुछ नहीं बिगाड़ सकते है। फिर सरकार भी उनके साथ है क्यो न हो लोकतंत्रिक जनता है। पुलिस जवानो की विधवाओ के आंसू पोछने भले ही नहीं जा पाएगी। कारगिल की लड़ाई भूल जाएगी। लेकिन कड़ी सुरक्षा में माइ नेम इज खान देखेगी। पहले भी भारत देश नाच गाना सुनने वाले और मनोरंजन की दुुनिया में खोने वाले राजा महाराजा नवाबो के कारण गुलाम हो चुकी है। अब फर्क बस इतना है कि अब राजा महाराजा नवाब नहीं रहे यहां की जनता ही आजादी पाकर इनका इतिहास रचने जा रही है। कला भावना और खेल भावना से देश को गुलाम करने जा रही है।

1 comment:

Suresh Chiplunkar said...

अच्छा लिखा है आपने… और विस्तार दें…