Friday, July 17, 2009

लोहा खदान की सुरक्षा में जुटा था मुख्यालय


मानपुर इलाके में स्थित पल्लामाड़ लोहा खदान एक निजी कंपनी को सौपे जाने के बाद से नक्सलियों ने इसे बंद करवाने का फरमान जारी किया था। वहीं उच्चस्तरीय आदेश के तहत पुलिस मुख्यालय लोहा खदान की सुरक्षा में जुटा हुआ था। चौकी खुलवाकर और कैंप लगाकर किसी भी तरह नक्सलियों से निपटने के लिए तैयार था। लेकिन राजनंदगांव के उच्चाधिकारी बल की कमी को देखते हुए यहां कैंप लगाने और चौकी खोलने के पक्ष में शुरु से नहीं थे। एसपी विनोद कुमार चौबे की शहादत के बाद विभाग में चल रहे अफसरशाही का मामला एक के बाद एक कर उजागर होता जा रहा है। पुलिस मुख्यालय में बैठे आला अफसरों को मालूम था कि पल्लामाड़ में लगाए गए लोहा खदान का नक्सली पोरा जोर विरोध कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा खदान के प्रदुषण से वहां के खेतखलिहान को बरबाद किए जाने आरोप भी लगाया जाता रहा। इस विरोध को दबाने के लिए वहां पुलिस की चौकी और कैंप लगाए जाने का मुख्यालय ने आदेश जारी किया था। मुख्यालय के एसी कमरो में रिर्मोट दबाकर कागजों पर नक्सली हमले का एक्शन प्लान बनाने वाले अफसरों की पोल धमतरी और राजनंदगांव की घटना के बाद एक एक कर खोल रही है। हालांकि धमतरी की घटना के समय डीजीपी अनिल एम नवानी पर टिकारा फोड़ा गया था। इस घटना के बाद डीजीपी विश्वरंजन को छुट्टी से वापस बुलाकर फिर से ज्वाइनिंग दिलाई गई थी। लेकिन दो महीने बाद भी कागजों पर योजना तैयार करने के अलावा कोई विशेष कार्य नहीं हो पाया। राजनंदगांव एसपी विनोद कुमार चौबे मदनगढ़ चौकी खोले जाने के पक्ष में नहीं थे। उन्हें अर्ध सैनिक बल की संख्या को देखते हुए चौकी खोलने पर एतराज किया था। इस प्रभावित क्षेत्र खडग़ांव चौकी प्रभारी ने बल की कमी को देखते हुए चौकी जाना ही छोड़ दिया था। जिसकी विभागीय जांच भी की जा रही है। बहारहाल नक्सली मानपुर डिविजन में लोकसभा चुनाव के समय से ही पर्चा बांटकर गांव गांव में सभा ले रहे थे। पुलिस के उच्चाधिकारी भी इस बात से इंकार नहीं कर सकते है। इस घटना के बाद भी भाकपा मानपुर ने लोहा खदान का विरोध जारी रखा है। बाक्स लिट्टे की ट्रेनिंग थी नक्सलियों के पास राज्य पुलिस के उच्चाधिकारी भले ही घटना स्थल पर अब तक नहीं पहुंचे है। लेकिन केन्द्रीय खुफिया तंत्र ने इस पूरी घटना के तौर तरीके पर लिट्टे की ट्रेनिंग का हवाला दिया है। एक लंबे समय से यह अनुमान लगाया जाता रहा है कि ८० के दशक में नक्सली कमांडरों ने लिट्टे से ट्रेनिंग प्राप्त की थी। हालांकि इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है। लेकिन नक्सलियों की मिलिट्री कमीशन के पास लिट्टे की समकक्ष ट्रेनिंग होने की पुष्टि होती रही है। भले गैर जानकार अफसर बार बार इस हमले में गुरिल्ला वार का हवाला दे रहे है। लेकिन दोनो ओर से घेरा बंदी कर की गई गोलीबारी लिट्टे की प्रसिद्ध चीता युद्ध की पहचान हैं। इसकी ट्रेनिंग लिट्टे के लड़ाके (तमिल चीते) के पास थी। आईजी गुप्ता की पृष्ठभूमि की जांच होपीसीसी अध्यक्ष धनें्र साहू ने मानपूर से लौटकर पूरे मामले में दुर्ग आई जी मुकेश गुप्ता की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच की है।

No comments: