Tuesday, July 28, 2009

सेना से नक्सलियों को बचाने मानवाधिकारों के ठेकेदार आगे आए


केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने छत्तीसगढ़, ङाारखंड, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश व महाराष्ट्र में काम कर रहे नक्सली संगठनों को निशाना बनाते हुए स्पष्ट शब्दों में सैन्य कार्रवाई करने का संकेत दिया है। सैन्य कार्रवाई की कल्पना से ही नक्सली समर्थक संगठनों में हड़कंप मचा हुआ है। डा.विनायक सेन को जेल से रिहा कराने के लिए बनी केंद्रीय समिति ने सैन्य कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन छेडऩे की घोषणा करते हुए नक्सलियों से शांतिवार्ता करने की मांग रखी है।देश के ११ राज्यों में नक्सलियों के पांव पसारने और पांच राज्यों में समानांतर सरकार चलाने के प्रयास को विफल करने के लिए केंद्र ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। खासतौर से लालगढ़ की घटना के बाद सरकार ने नक्सलियों को आतंकवादियों की Ÿोणी में रखा है। अब तक केंद्र इसे राज्य की समस्या मानती आई थी, लेकिन अब छत्तीसगढ़, उड़ीसा, ङाारखंड, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश में एकाधिकार रखने वाले नक्सलियों के खिलाफ कें्र ने सैन्य कार्रवाई की मानसिकता बना ली है। दूसरी ओर सरकार के इस कड़े कदम और कोबरा बटालियन की स्थापना को देखते हुए मानवाधिकार संगठनों ने आगे चलकर बड़े पैमाने पर नरसंहार होने की संभावना व्यक्त की है। सूत्रों के मुताबिक डा.विनायक सेन को रिहा कराने देश के सभी राज्यों में बनाई गई केंद्रीय समिति ने दिल्ली में बैठक का आयोजन किया है। इसमें छत्तीसगढ़, ङाारखंड व उड़ीसा के पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया है। जेल से रिहा होने के बाद पीयूसीएल के महासचिव डा.विनायक सेन भी इस बैठक में पहली बार शामिल हुए हैं। बैठक में मानवाधिकार संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा है कि सरकार द्वारा नक्सलियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से लाखों की संख्या में निर्दोष आदिवासियों की जान को खतरा है। सरकार नक्सलवाद को खत्म करने के लिए शांतिवार्ता आयोजित करे। नक्सल प्रभावित राज्यों में अद्र्धसैनिक बलों की कार्रवाई से पहले ही लाखों की संख्या में आदिवासियों को क्षति पहुंचाई जा चुकी है।बाक्सदिल्ली में भी सक्रिय अब तक दिल्ली में आईएसआई के एंजेट पकड़े जाते रहे हैं, वहीं पिछले महीने एक महिला नक्सली और नक्सली समर्थक पकड़े गए हैं। इनकी दिल्ली में उपस्थिति से हंगामा मचा हुआ है। दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार दर्जनों की संख्या में नक्सली समर्थक यहां मौजूद हैं, लेकिन इनके खिलाफ दिल्ली पुलिस के पास साक्ष्य नहीं है।

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